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सृजनगाथा
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वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008
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।। गीत ।।
युएसए का प्रवासी साहित्य
आ गया मधुमास
कुसुम सिन्हा
फूल मुस्काते
गूँजते हैं गीत के स्वर
भ्रमर है गाते
याद आई फिर तुम्हारी
तुम नहीं आए
फूल कलियों ने सजाया
फिर से उपवन को
झील के जल पर
गगन के रूप का जादू
लहरों पे है डोलता
किरण के रंग का जादू
फिर हृदय के वृक्ष पर
कुछ फूल खिल आए
मिलन के सपनों ने
अपने पंख फैलाए
याद करती हैं ये लहरें
पास आ आ कर
लौट आती हैं व्यथित
तुमको नहीं पाकर
गगन में उड़ते पखेरू
घर को लौटे हैं
हृदय के तारों पर लगा
कोई गीत है बजने
जागकर सोते से
सपने हैं लगे सजने
इक अजानी प्यास मन में
कसमसाई है
हवा में खुशबू है कोइ तैरती आई
कोइ सन्देशा तुम्हारा
साथ है लाई
यू.एस.ए
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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः प्रशांत रथ