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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। गीत ।।

 

 युएसए का प्रवासी साहित्य

आ गया मधुमास


कुसुम सिन्हा

 

गया धुमास लेकर

            फूल मुस्काते

गूँजते हैं गीत के स्वर

            भ्रमर है गाते

याद आ फिर तुम्हारी

           तुम नहीं आए

 

फूल कलियों ने सजाया

           फिर से उपवन को

झील के जल पर

        गगन के रूप का जादू

हरों पे है डोलता

        किरण के रंग का जादू

याद आई फिर तुम्हारी

         तुम नहीं आए

फिर हृदय के वृक्ष पर

          कुछ फूल खिल आए

मिलन के सपनों ने

           अपने पंख फैलाए

याद आई फिर तुम्हारी

           तुम नहीं आए

याद करती हैं ये लहरें

           पास आ आ कर

लौट आती हैं व्यथित

           तुमको नहीं पाकर

गगन में उडते पखरू

          घर को लौटे हैं

याद आई फिर तुम्हारी

          तुम नहीं आए

हृदय के तारों पर लगा

           को गी है बजने

जागकर सोते से

           सपने हैं लगे सजने

याद आई फिर तुम्हारी

            तुम नहीं आए

इक अजानी प्यास मन में

          कसमसा है

हवा में खुशबू है कोइ तैरती आई

          कोइ सन्देशा तुम्हारा

साथ है ला

याद आई फिर तुम्हारी

         तुम नहीं आए

   कुसुम सिन्हा

यू.एस.ए

 

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