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ललित निबंध
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मेरी पहली कविता
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अज्ञेय,
सच्चिदानंद हीरानंद
मैं तब शायद चार साल
का था-कम से कम पाँच साल से अधिक का तो नहीं था जब की बात
है-क्योंकि लखनऊ की बात
है जो मैं ने पाँच वर्ष की आयु में छोड़ दिया था। कोई सम्बन्धी
बाहर से आ कर हमारे
यहाँ ठहरे थे। हम बहन-भाइयों के लिए खिलौने लाये थे। मुझे एक
फिरकनी मिली। उस का
नाम मैं नहीं जानता था,
उन्होंने बताया-भुमीरी।
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जीवन क्या जीया
-
मनु
शर्मा

कहानी
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नाम
-
श्रीकृष्ण
कुमार त्रिवेदी
यह खबर फैलते ही सारे शहर मे हडताल हो गई। हजारों लोग चीरघर पर
इकटठा हो गए और पुलिस को
ज़ोर ज़ोर
से गालियाँ देने लगे,
'इन्हे
सब पता था। ये चाहते तो यह सब न होता। उस जंगल कें तो यह
रोज़
चक्कर लगाने का दावा करते थे। पकडा गया आदमी वहॉ क्या कर रहा
था?...

व्यंग्य
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ऐसे भी माँगे,
वैसे भी माँगें
-
रामदेव धुरंधर,
मॉरीशस
गले से गला मिलाने और मीठे को मीठा लौटाने की
प्रक्रिया में एक आदमी ने
एक रोज सपन से कहा,
‘‘भैया,
मुझे तो लगता है आप हाथों में जादू लेकर आये हैं। यहाँ
की ज़मीन पर फूल कहाँ होते थे,
यूँ कहूँ कि फूल बोना यहाँ अँधेरे में तीर चलाने
जैसा था।
कृति-समीक्षा
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बात बात में
बात
/
समीक्षा ठाकुर
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संस्कृति के प्रतिचिन्ह
/
आसिफ़ इकबाल

ग्रंथालय में (ऑनलाइन किताबें)
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कविता कोश
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ललित कुमार
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सर्वेश्वरदयाल और उनकी पत्रकारिता
-शोध-
संजय द्विवेदी
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सैरन्ध्री
- खंडकाव्य -
मैथिलीशरण गुप्त
◙ होना
ही चाहिए आँगन
- कविता -
जयप्रकाश मानस
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प्रिय कविताएँ
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भगत सिंह सोनी

हलचल
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रायपुर में लघुकथा पर पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
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सौ से अधिक
रचनाकारों का सम्मान
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राष्ट्रीय अंलकरणों से रचनाकार सम्मानित
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पं.
चिरंजीवी दास स्मृति व्याख्यान माला संपन्न
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हिंदी सेवी जगदीप सिंह दांगी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित
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भारत भवन, लंदन में विश्व हिंदी दिवस
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पुस्तक की भूमिका
विषय पर सेमीनार
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अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति
का 14वाँ अधिवेशन 12 अप्रैल से


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