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साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

इस अंक में पढ़िये

समकालीन कविताएँ

एक कथा - बद्रीनारायण

तीन कविताएं - अशोक गुप्ता  

न आता इधर तो, पास जाकर - केशव शरण

नीला पहाड़, स्मृति - हरकिशोर दास

एक बूढ़े की ज़िद - कुशेश्वर

 

ग़ज़ल

ख़यालों का आइना काग़ज़ -चाँद 'शेरी'

ज़िंदगी का निचोड़ - ख़याल खन्ना

अपना घर आया - कुमार नवीन

रंग बिरंगे लोग - मुनीर बख़्श आलम

 

भाषांतर

मेरा क्या अपराध?-तमिल-आर.विलिनाथन्-नारायण प्रसाद

मुझे एक प्रकार की आवाज़ सुनाई देती थी मानो मेरी आत्मा कह रही हो - दामोदर !  इन सबका तू ही उत्तरदायी है । बच्चों को झूठी चिट्ठियाँ देकर तूने ही उनके मन में वृथा आशा और अभिलाषा की सृष्टि की है । उसी का तो यह परिणाम है । इस प्रकार की घटना कितने परिवारों में घटी है, कौन जानता ह...

रेत - पंजाबी- हरजीत अटवाल - अनुवादः सुभाष नीरव

 

व्याकरण

एक शब्द - छाती - डॉ. गंगाप्रसाद बरसैंया

 

मूल्याँकन

काव्य से राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना...- प्रो.महावीर सरन जैन

लघुकथा का वर्तमान - सी.आर.राजश्री

 

संस्कार

मनुष्यत्व से साक्षात्कार - निर्मल वर्मा

साहित्य वह घर है-बिना दीवारों का घर- जहाँ वह पहली बार अपने मनुष्यत्व से साक्षात्कार करता है। यह सत्य का अनुभव है, सुख का नहीं। यदि हमें सुख की सुरक्षा चाहिए, तो हमें साहित्य के पास नहीं जाना चाहिए, घर शब्द से जो सुरक्षा की सुगंध आती है, वह साहित्य में नहीं है। घर वह सिर्फ इस अर्थ में है कि वहाँ हम समस्त बाहरी सत्ताओं से छुटकारा पाकर अपने सत्य के पास लौटते हैं

क नये समीक्षक...(सातवाँ भाग) - जार्ज बर्नार्ड शॉ

 

कथोपकथन

जैसी प्रकृति होगी, वैसा वह परंपरा से ग्रहण करेगा

(निबंधकार रंजना अरगडे से सृजनगाथा की बातचीत)

 

प्रसंगवश

भारतीय मुसलमानों द्वारा आंतकवाद विरोध-तनवीर जाफ़री

 

शेष-विशेष

शोध....

हिंदी लघुकथा का विकास(भाग6)- डॉ. अंजलि शर्मा

मीडिया...

बहुत बदल जाएगा मीडिया का चेहरा - संजय द्विवेदी

हिन्दी पत्रकारिता:ये कौन सी भाषा है - शिशिर द्विवेदी

मित्र प्रसंग....

त्रिलोक सिंह - कृष्ण सा व्यक्तित्व - गिरीश बिल्लोरे

 

प्रवासी-पातियाँ

इटली से...

यादों की किताबें - सुनील दीपक

नेपाल से...

नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद्: एक परिचय- कुमुद अधिकारी

यु.के.से...

घर की दीवार में एक सम्मानित खिड़की- मोहन राणा

मॉरीशस की डायरी...

मॉरीशसीय हिन्दी कहानियाँ: एक झलक -विनय गुदारी

 

ललित निबंध

मेरी पहली कविता - अज्ञेय, सच्चिदानंद हीरानंद

मैं तब शायद चार साल का था-कम से कम पाँच साल से अधिक का तो नहीं था जब की बात है-क्योंकि लखनऊ की बात है जो मैं ने पाँच वर्ष की आयु में छोड़ दिया था। कोई सम्बन्धी बाहर से आ कर हमारे यहाँ ठहरे थे। हम बहन-भाइयों के लिए खिलौने लाये थे। मुझे एक फिरकनी मिली। उस का नाम मैं नहीं जानता था, उन्होंने बताया-भुमीरी।

जीवन क्या जीया - मनु शर्मा

 

कहानी

नाम - श्रीकृष्ण कुमार त्रिवेदी

यह खबर फैलते ही सारे शहर मे हडताल हो गई। हजारों लोग चीरघर पर इकटठा हो गए और पुलिस को ज़ोर ज़ोर से गालियाँ देने लगे, 'इन्हे सब पता था। ये चाहते तो यह सब न होता। उस जंगल कें तो यह रोज़ चक्कर लगाने का दावा करते थे। पकडा गया आदमी वहॉ क्या कर रहा था?...

 

व्यंग्य

ऐसे भी माँगे, वैसे भी माँगें - रामदेव धुरंधर, मॉरीशस

गले से गला मिलाने और मीठे को मीठा लौटाने की प्रक्रिया में एक आदमी ने एक रोज सपन से कहा, ‘‘भैया, मुझे तो लगता है आप हाथों में जादू लेकर आये हैं। यहाँ की ज़मीन पर फूल कहाँ होते थे, यूँ कहूँ कि फूल बोना यहाँ अँधेरे में तीर चलाने जैसा था।

 

कृति-समीक्षा

बात बात में बात / समीक्षा ठाकुर

संस्कृति के प्रतिचिन्ह / आसिफ़ इकबाल

 

ग्रंथालय में (ऑनलाइन किताबें)

कविता कोश - ललित कुमार

सर्वेश्वरदयाल और उनकी पत्रकारिता -शोध- संजय द्विवेदी

सैरन्ध्री - खंडकाव्य - मैथिलीशरण गुप्त

 होना ही चाहिए आँगन  - कविता - जयप्रकाश मानस

प्रिय कविताएँ - भगत सिंह सोनी

 

हलचल

रायपुर में लघुकथा पर पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न

सौ से अधिक रचनाकारों का सम्मान

राष्ट्रीय अंलकरणों से रचनाकार सम्मानित

 पं. चिरंजीवी दास स्मृति व्याख्यान माला संपन्न

हिंदी सेवी जगदीप सिंह दांगी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

भारत भवन, लंदन में विश्व हिंदी दिवस

पुस्तक की भूमिका विषय पर सेमीनार

अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति का 14वाँ अधिवेशन 12 अप्रैल से

 

 

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