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सृजनगाथा
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वागर्थ प्रतिपत्तये
वर्ष-3, अंक-25, जून, 2008
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।। कविता ।।
नन्हीं चिडिया
नन्हीं चिड़िया
घोंसला बनती है
अंडे सेती है
बच्चे निकले
दाने खिलाती है
पँख उगते ही उड़ जाते है - विदेश
अकेली
प्रतीक्षा करती है
फिर तोड़ देती है
घोंसला
क्योंकि जानती है
अब नही आयेंगे वो
मेरी चाहत
दो नयन साफ़
एक मुट्ठी आकाश
आँचल भर सपने
और तुम्हारी आस
रचना श्रीवास्तव
5201 par dr
apt 121
denton tx, USA
76208 ◙◙◙
कवि
स्मरणीय
- जगदीश चतुर्वेदी
- 'शलभ' श्रीराम सिंह
समकालीन कवि
- प्रताप सोमवंशी
- डॉ. प्रेम दुबे
- मोहन राणा
- अनिल एकलव्य
प्रवासी कलम
- रचना श्रीवास्तव
माह का कवि
- रश्मि रमानी की तीन कविताएँ
... वह याद कर रही है कुछ
... माँ की बरसी
... अजनबी
संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः प्रशांत रथ