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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-25, जून, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। कविता ।।

 

 

जीवन बचा है अभी

 

जीवन बचा है अभी

ज़मीन के भीतर नमी बरकरार है

हरापन जड़ों के अंदर साँस ले रहा है !

 

जीवन बचा है अभी

रोशनी खोकर भी हरकत में है पुतलियाँ

दिमाग सोच रहा है जीवन के बारे मे

ख़ून दिल तक पहुँचने की कोशिश में है !

 

जीवन बचा है अभी

सूख गए फूल के आसपास है ख़ुशबू

आदमी को छोड़कर भागे नहीं है सपने

भाषा शिशुओं के मुँह में आकार ले रही है

जीवन बचा है अभी !

    'शलभ' श्रीराम सिंह

 ◙◙◙

 

कवि

स्मरणीय

- जगदीश चतुर्वेदी

- 'शलभ' श्रीराम सिंह

समकालीन कवि

- प्रताप सोमवंशी

- डॉ. प्रेम दुबे

- मोहन राणा

- अनिल एकलव्य

प्रवासी कलम

- रचना श्रीवास्तव

 माह का कवि

- रश्मि रमानी की तीन कविताएँ

... वह याद कर रही है कुछ

... माँ की बरसी

... अजनबी

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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