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सृजनगाथा
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वागर्थ प्रतिपत्तये
वर्ष-3, अंक-25, जून, 2008
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।। कविता ।।
डॉ. प्रेम दुबे की दो कविताएँ
बच्चा मन की तरह है
बच्चा जिद्दी है
डाँट खाता है
भागता है
फिर वहीं आता है
छेद से झाँकता है
मन को कौन समझाए ?
केवल बुत था
कठवाया सा देख रहा था
नहीं कहीं स्पन्द
निशानी जीवन की
कौन बताए
उसके मन में
कितना दुःख था
डॉ. प्रेम दुबे
2/1077, पंचवटी-भवन उपमार्ग
गंगानगर, रामुकंड़, रायपुर - 492001
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कवि
स्मरणीय
- जगदीश चतुर्वेदी
- 'शलभ' श्रीराम सिंह
समकालीन कवि
- प्रताप सोमवंशी
- डॉ. प्रेम दुबे
- मोहन राणा
- अनिल एकलव्य
प्रवासी कलम
- रचना श्रीवास्तव
माह का कवि
- रश्मि रमानी की तीन कविताएँ
... वह याद कर रही है कुछ
... माँ की बरसी
... अजनबी
संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः प्रशांत रथ