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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-25, जून, 2008

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।। कविता ।।

 

 

वह याद कर रही है कुछ

 

गुलमोहर

दहकने लगा है

एक बार फिर

अमलतास का सुनहलापन

दमकता है दिन-प्रतिदिन

दफ़्तर से लौटती लड़की के पास

इतना वक्त नहीं होता

कि, वह तमाम चीज़ों के बारे में सोचे

पर, एक लड़की

एक अकेली उदास लड़की

देखती है गुलमोहर को अपलक

धीरे से छूती है

अमलतास के नीचे झुके

सुनहले गुच्छे को

उसके होंठों  की थरथराहट से

लगता है

वह याद कर रही है कुछ

शायद

गुज़रे दिन

कोई भूली बिसरी याद

या, कोई अधूरा प्यार।

    रश्मि रमानी

इंदौर, म.प्र.

 ◙◙◙

कवि

स्मरणीय

- जगदीश चतुर्वेदी

- 'शलभ' श्रीराम सिंह

समकालीन कवि

- प्रताप सोमवंशी

- डॉ. प्रेम दुबे

- मोहन राणा

- अनिल एकलव्य

प्रवासी कलम

- रचना श्रीवास्तव

 माह का कवि

- रश्मि रमानी की तीन कविताएँ

... वह याद कर रही है कुछ

... माँ की बरसी

... अजनबी

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