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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-25, जून, 2008

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।। हलचल ।।

 

 

प्रख्यात नाटककार विजय तेंदुकलकर का निधन अपूरणीय क्षति - राष्ट्रपति

मुंबई। प्रख्यात नाटककार विजय तेंदुकलकर का 19 मई को यहा निधन हो गया। वह मांसपेशियों की बीमारी मायस्थेनिया ग्रेविस से पीड़ित थे और उन्हें कुछ सप्ताह पहले शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने उनके निधन पर गहरा दु:ख प्रकट किया है। अपने शोक संदेश में उन्होंने तेंदुलकर को मराठी जगत की एक ऐसी शख्शियत करार दिया जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। उन्होने श्री तेंदुलकर को देश के शीर्षस्थ नाटककारों में एक बताते हुए कहा कि उनके नाटकों ने केवल मराठी रंगमंच ही नहीं बल्कि भारतीय रंगमंच को भी नयी दिशा दी। उनके निधन से रंगमंच तथा साहित्य की अपूरणीय क्षति हुई है। तेंदुलकर ने मराठी और हिंदी की कई फिल्मों की पटकथा लिखी। मुम्बई में बसे विजय तेंदुलकर के परिवार में (स्वर्गीय प्रिया तेंदुलकर के अलावा) दो पुत्रिया हैं। तेंदुलकर के अंतिम समय में उनकी दोनो पुत्रियां उनके पास ही थीं।

 

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे विजय तेंडुलकर(6 जनवरी 1928 - 19 मई 2008) को विरासत में साहित्य का सौंधा अनुकूल वातावरण मिला। कब नन्हे हाथों ने कलम थाम ली, खुद उन्हें भी नहीं पता था। 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई। संघर्ष के शुरुआती दिनों में वे 'मुंबइया चाल' में रहे। 'चाल' से बटोरे सृजनबीज बरसों मराठी नाटकों में अंकुरित होते दिखाई दिए। 1961 में उनका लिखा नाटक 'गिद्ध' खासा विवादास्पद रहा। 'ढाई पन्ने' 'शान्तता कोर्ट चालू आहे', 'घासीराम कोतवाल' ने मराठी थियेटर को नवीन ऊँचाइयाँ दीं। नए प्रयोग, नई चुनौतियों से वे कभी नहीं घबराए, बल्कि हर बार उनके लिखे नाटकों में मौलिकता का अनोखा पुट होता था। कल्पना से परे जाकर सोचना उनका विशिष्ट अंदाज था। भारतीय नाट्य जगत में उनकी विलक्षण रचनाएँ सम्मानजनक स्थान पर अंकित रहेंगी। अपने जीवनकाल में विजय तेंडुलकर ने पद्मभूषण (1984), महाराष्ट्र राज्य सरकार सम्मान (1956, 69, 72), संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (1971), 'फिल्म फेयर अवॉर्ड (1980, 1999) एवं महाराष्ट्र गौरव (1999) जैसे सम्मानजनक पुरस्कार प्राप्त किए थे।

 

सृजन-गाथा परिवार की ओर से उन्हें आत्मीय श्रद्धांजलि ।

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