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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-25, जून, 2008

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।। हलचल ।।

 

 

  राजभाषा साधन सी.डी. का विमोचन

कोयंबत्तूर। कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्य सचिव डॉ. सी. जय शंकर बाबु द्वारा संकलित एवं प्रस्तुत 'राजभाषा साधन' कंपैक्ट डिस्क का विमोचन राजभाषा विभाग, क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यान्वयन कार्यालय, कोच्चिन के उप निदेशक (कार्यान्वयन) डॉ. वी. बालकृष्णन द्वारा 22 मई, 2008 को कोयंबत्तूर में आयोजित नराकास की अर्द्ध-वार्षिक बैठक के अवसर पर किया गया । 

 

इस सी.डी. में राजभाषा कार्यान्वयन तथा हिंदी ज्ञानवर्द्धन में उपयोगी साधनों का संकलन किया गया है । विमोचन के पश्चात् अपने वक्तव्य में डॉ. बालकृष्णन ने कहा कि कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति का यह एक अनूठा प्रयास है । इस प्रयास हेतु समिति के सदस्य-सचिव की प्रशंसा में उन्होंने कहा कि डॉ. सी. जय शंकर बाबु राजभाषा हिंदी के क्षेत्र में प्रगतिशील नाम है । उन्होंने कहा कि हिंदी के साथ रागात्मक तरीके से जुड़ना चाहिए । ऐसा न होकर यदि सिर्फ़ संवैधानिक मापदंडों के लिए हिंदी बढ़ेगी तो वह मज़बूरी से ही बढ़ेगी । विमोचन के अवसर पर अपने वक्तव्य में समिति के अध्यक्ष  के. श्रीनिवासन ने कहा कि कोयंबत्तूर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति अपनी विशिष्ट गतिविधियों से एक संस्थान का रूप ले लिया है । राजभाषा कार्यान्वयन के विविध आयामों में सदस्य-कार्यालयों को साधन संपन्न बनाने के उद्देश्य से डॉ.  बाबु द्वारा बनाई गई सी.डी. का उपयोग करते राजभाषा कार्यान्वयन की दिशा में आनेवाली समस्याओं के लिए समाधान ढूँढ़ पाना तथा सभी कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन में एकरूपता लाना भी संभव है । उन्होंने नराकास के सदस्य कार्यालयों से अपील की कि इस सी.डी. का सही रूप में उपयोग करते हुए राजभाषा कार्यान्वयन में प्रगति हासिल करने का प्रयास किया जाए । 

 

सी.डी. के संबंध में अपने वक्तव्य में डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने कहा कि सूचना-प्रौद्योगिकी ने आज हमारे जीवन के समस्त पहलुओं को प्रभावित किया है ।  भाषाओं के विकास की दिशा में यह वरदान साबित हुआ है । सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञों का ध्यान भाषाओं की ओर भी आकृष्ट हुआ है । परिणामतः भाषाओं के विकास में उपयोगी कई उपकरण इनके द्वारा विसकित किए गए हैं । इनके प्रयोग से हम अपने कामकाज में गतिशीलता एवं गुणात्मकता सुनिश्चित कर सकते हैं । राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार के लिए आज कई साधन उपलब्ध हैं । ऐसे साधनों के प्रति जागरूकता के अभाव में इनका प्रयोग एवं सदुपयोग नहीं हो पाता है । विकसित तकनीकों का ही प्रयोग करते हुए अत्यंत कम खर्च से अधिकाधिक उपयोगी साधन 'राजभाषा साधन' के नाम से इस कंपैक्ट डिस्क के रूप में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है । इससे नराकास के सदस्य-कार्यालयों में राजभाषा कार्यान्वयन के लिए उपयोगी साधन उपलब्ध रहना सुनिश्चित हो पाएगा । 

 

सी.डी. की विषय-वस्तु के संबंध में विस्तृत प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में उपयोगी महत्वपूर्ण जानकारी, राजभाषा विभाग द्वारा जारी नियम पुस्तकें, वार्षिक कार्यक्रम, हिंदी भाषा एवं कंप्यूटर प्रशिक्षण कैलेंडर, महत्वपूर्ण परिपत्र, संसदीय राजभाषा समिति की प्रश्नावली, हिंदी व्याकरण ई-पुस्तक, कई उपयोगी प्रपत्र, ई-पत्रिका 'कोंगु निधि', शब्दकोश और उपयोगी साफ्टवेयर उपकरणों की कड़िया आदि भी इसमें शामिल की गई हैं ।  इनके अलावा हिंदी के संबंध में कुछ लेख भी हैं जिसमें एक लेख के माध्यम से हिंदी के लिए यूनिकोड का उपयोग करने हेतु प्रेरित भी किया गया है । 

 

इस सी.डी. का वितरण नराकास, कोयंबत्तूर के सभी सदस्य-कार्यालयों के बीच किया गया है । राजभाषा कार्यान्वयन के कार्य में एक महत्वपूर्ण साधन एवं उपकरणों के संकलन के रूप में यह कंपैक्ट डिस्क कारगर सिद्ध होगा ।

 

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