|
काँधे को दरकार
रखे साथ क्यूं कर हज़ार आदमी
हैं कांधे को दरकार चार आदमी
तसन्नो, बनावट, अदा कारियाँ
मिले है कई वज़्अ-दार आदमी
ग़रीबों की कोई भी गिनती नहीं
अमीर आदमी, बा-वक़ार आदमी
ख़ुदा है तो आ सामने भी ज़रा
कहाँ तक करे इंतिज़ार आदमी
सजाता है मर कर भी
महफ़िल 'ख़याल'
बनाता है अपना मज़ार आदमी
ख़याल खन्ना कानपुरी
1090, जनकपुरी
बरेली
उ.प्र. -
243122
◙◙◙
|