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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-25, जून, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। छंद ।।

 

 

 

 

अभिनव चुटकियाँ-2

दिल्ली जयपुर लखनऊ काशी हैदराबाद,
मासूमों का खून क्यों बहा यहाँ उस्ताद


हमने तुमने सुन लिया किया बड़ा अफ़सोस,
बोल नहीं पाये कभी जय सुभाष चन्द्र बोस


खेल
-कूद में कूद रहे भोगी अब सामंत,
लीडर अपने हों चिअर संस्कृति का अंत,

युगों युगों तक गूंजता उनका ही अस्तित्व,
चुटकी में जो छोड़ते राज पाट सर्वस्व

    अभिनव शुक्ला

206-694-3353
Seattle, WA, USA

  ◙◙◙

ग़ज़ल

शकील ग्वालियरी

- हमारे पास कुछ होता तो

- किसी शै की कमी है

- कोई सूरज है तो आए

- कहाँ पड़ रहे हैं क़दम

- बाज़ारों में क्या रक्खा है

ख़याल खन्ना

मधुकर अष्ठाना

देवेन्द्र शर्मा 'इन्द्र'

गीत

डॉ. अजय पाठक

महावीर शर्मा

डॉ. विद्यासागर शर्मा

जगत प्रकाश चतुर्वेदी

वचन श्रीवास्तव

दोहा

रामनिवास मानव

चुटकियाँ

अभिनव शुक्ला

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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