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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-26, जुलाई, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। कविता ।।

 

 

हिंदी के महत्वपूर्ण कवि

मैंने घुटने से कहा

 

मैंने उसकी वरज़िश करते हुए कहा - प्यारे घुटने

तुम्हें सत्तर वर्ष चलना था

और तुम अभी स चोट खा गए

जबकि अभी '70 है । तुम्हें

भाषा के दलिद्दर से उबरना तुम्हें और

सारी कौम का सपना बनना था

 

कविता में कितना जहर है और कितना देश

अपनी गरीबी की मार का मुँह तोड़ने के लिए

एक शब्द कितना कारगर होता है ।

तुम्हें यह सवाल तय करना था ।

 

अपनी भूख और बेकारी और नींद को

साहस की चौकी पर रख दो

और देखो कि दीवार पर उसका

क्या असर होता है ।

 

गुस्से का रंग नीला या जोगिया

गुस्से का रंग बैंगनी या लाल

गुस्से का एक रंग ठीक उस तरह जैसे ख़ुसरो गुस्सा

            या गुस्सा कंगाल

(सुदामा पाँडे का प्रजातंत्र से)

    धूमिल

 ◙◙◙

 

कवि

स्मरणीय

- नरेश मेहता

- धूमिल

समकालीन कवि

- जितेन्द्र श्रीवास्तव

- स्वप्निल श्रीवास्तव

- जसवीर चावला

- सुभाष नीरव

प्रवासी कलम

- सत्येंद्र श्रीवास्तव

 माह का कवि

- इंदिरा परमार

... कछारों पर शाम

...  आषाढ़ की धूप

...  वर्षा का एक दिन/ सत्य

...  गंध फूल

...  बादल

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