vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-26, जुलाई, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। हलचल ।।

 

 

''ज़िंदगी ख़ामोश कहाँ'' हुई लोकार्पित

 

बीकानेर। युवा शायर मोहम्मद इरशाद की प्रथम कृति ''ज़िंदगी ख़ामोश कहाँ'' का लोकार्पण विख्यात शायर शीन काफ निज़ाम के मुख्य आतिथ्य में 12 जून 08 को बीकानेर के टाउन हॉल में सम्पन्न हुआ। विशिष्ट अतिथि थे कवि कथाकार मालचन्द तिवाड़ी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर गुलाम रसूद शादज़ामी ने की।

      

शायर शीन काफ़ निज़ाम ने कहा कि अदब दूसरों को रोशनी देने की बजाय ख़ुद को रोशनी देता है। उन्होंने ग़ज़ल पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए फरमाया कि ग़ज़ल हमे अनुशासन के साथ-साथ यह बताती है कि हमें क्या नहीं करना है। युवा शायर मोहम्मद इरशाद ने अपने पहले ग़ज़ल संग्रह में ख्यातनाम शायर मीर की शेरो-शायरी की याद ताज़ा कर दी। निज़ाम ने कहा कि अहसास को अल्फाज़ देने का नाम ग़ज़ल है। ग़ज़ल बुनियादी निष्कर्ष नहीं देती किंतु कैफ़ियत ज़रूर पैदा करती है।

      

समारोह के अध्यक्ष ग़ुलाम रसूल शादज़ामी ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रस्तुत ग़ज़ल संग्रह दिल की गहराईयों के साथ सामने लाया गया है। शायरी और ग़ज़ल जीवन के विभिन्न पहलुओं को हमारे सामने लाती है और सहज, सरल भाव से हमारे मनोभावों का चित्रण करती है।

      

मालचन्द तिवाड़ी ने कहा कि प्रस्तुत ग़ज़ल संग्रह अहसास के भाव को सामने रखता है। ''ज़िन्दगी ख़ामोश कहाँ'' हमारे सामने अनेक भावाभिव्यक्तियाँ खोलती है, जो वास्तव में सराहनीय है। शायर ने इस ग़ज़ल संग्रह के साथ उर्दू अदब की महान परम्परा को आगे बढाने का प्रयास किया है। शायर ने अपने पहले संग्रह में विरासत को बखूबी संजोया है।

      

इस अवसर पर युवा कवि कथाकार संजय पुरोहित ने लोकार्पित ग़ज़ल संग्रह तथा लेखक मोहम्मद इरशाद का परिचय प्रस्तुत किया। पुस्तक लोकार्पण के पश्चात् शायर मोहम्मद इरशाद ने चुनीन्दा रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं की दाद बटोरी।

      

समारोह में रंगकर्मी राम सहाय हर्ष, कवयित्री श्रीमती चंचला पाठक, चित्रकार मुकेश जोशी ने पुस्तक के बारे में अपना नज़रिया पेश किया। अमजद अली ने एक ग़ज़ल का सस्वर पाठ किया । स्वागत उद्बोधन शिक्षाविद् विद्यासागर आचार्य ने प्रस्तुत किया जबकि आभार अशफाक़ कादरी ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन युवा कवि कथाकार एवं नाटककार हरीश बी. शर्मा ने किया। लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार नन्दकिशोर आचार्य, लक्ष्मीनारायण रंगा, भवानी शंकर व्यास विनोद, गौरी शंकर आचार्य 'अरूण', कमल रंगा, राजेन्द्र जोशी, राजेश रंगा, संजय वरूण, रमेश भोजक समीर, गिरिराज खेरीवाल, दीप चन्द सांखला सहित अनेक रचनाकार, रंगकर्मी, पत्रकार एवं कलाधर्मी उपस्थित थे।

(बीकानेर से संजय पुरोहित की रपट)

 

◙◙◙

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google