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सृजनगाथा

 

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वर्ष-2, अंक-20, जनवरी, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। कविता ।।

 

 

शीला गुजराल की दो कविताएँ

 

बर्फ के चेहरे

 

बर्फ की फुही जब धीमे से धरा को छूती है
तब दिखता है-मानो सैकड़ों मील दूर बैठी बन्नो के कंगन की झंकार
खनकती, मचलती, उभरती, अनिल की बगिया में बैठ

मेरे कानों में अमृतरस घोलने आ पहुँची हो।
बर्फ की हल्की बौधार, जब चारों ओर अपना मादक रस टपकाती है
तब लगता है, मानो बन्नो की प्रणय-पुकार
भावावेश के झूले में खिलखिलाती, मेरे सोए हृदय को जगाने
हिमकण के रूम में उभरती हो।
बर्फ की भारी बौछार जब दूर क्षितिज तक धूम मचाती है
तब लगता है-
मानो बन्नो के ज्वलंत हृदय की कसक
टूटे अरमानों के अवशेषों से लिपट
आर्तनाद करती, जोरों से बिलख रही हो।
बर्फ का तूफान जब साँय साँय करता दिग्-दिगंत में गुर्राता है
तब ऐसा आभास होता है, मानो बन्नो का भग्न हृदय करंट-सा

मेरी धमनियों से लिपट
तांडव करता प्रलय को हुंकार रहा हो और

हमारी समवेत ध्वनि तूफान की गर्जना बन

समूची जगती को लील रही हो !

 

हिमानी

 

हिमानी,
नदी-नाले, पर्वत-वनानी
सभी को पाँव तले दबोच
चिर निद्रा में सुला
काल नियति का अनुशासन भूल
यूँ इठलाती
मानो स्वयं हो
अजर, अनश्वर।
रवि-रश्मियाँ आतीं, मोर्चा लगातीं
चतुर मायावी
कपट मुस्कान से झुठला
सम्मोहित करतीं
अपनी गरिमा भुला
धवल काया गुदगुदा
वापस लौट जातीं।

एक दो तीन
कई दिन, कई सप्ताह
यही कार्यक्रम
सम्राज्ञी की सजीली काया
बनती गई गठीली
नित नई रसीली
बिसर गए वे बीते दिन
जब लाख कोशिश करने पर भी
धरा को छू न पाती।

केवल तप्त हृदय के उच्छ्वास
तरल हिमकण
कभी कभार
पृथ्वी को चूम
मन का त्रास मिटाते थे।
तब कई बार चेष्टा की थी
उसने-
आँधी के डैनों पर बैठ
धरती तक पहुँचने की
और वह गँदली काई के
कलुषित रूप परिणत हो
आ बिफरती थी।
कुछ दिन हुए
वह फिर सचेत हुई-
अपना भाग्य आजमाने
धाक जमाने।
आश्वस्त हो
जब फिर लगी इठलाने
तब त्रस्त नदी-नाले, झरने तालाब
सब ने मिलकर
भानुदेव को पुकारा।
रवि ने पवन संग मोर्चा लगा
आतंक का अस्तित्व मिटाया।
कुछ ही दिनों में
मोम-सा पिघलता
हिमानी का गठीला शरीर
ढलकता, लुढ़कता चला आया
त्रस्त नदी नाले झरने तालाब
निर्बाध, निर्भय
खुशी के गीत गुनगुनाने लगे।

 

   शीला गुजराल

  ◙◙◙

 

हिंदी कविता

- नंद चतुर्वेदी

- शरद रंजन शरद

- शीला गुजराल

-  डॉ. राजेन्द्र सोनी

 

 

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