|
श्वास श्वास में गान
श्वास श्वास में गान भर दिया
गान गान में इस जीवन का
हर्ष शोकमय ध्यान भर दिया
तुमने ही तो पास बुलाया
मुसका कर नूतन जीवन भर
अनुभव का सागर दिखलाया
उमड़ रही थीं तान-तरंगें
प्राण प्राण की सजग उमंगें
मुग्ध तटस्थ पड़ा था यों ही
तुम ने नव आह्वान भर दिया
एक एक से बढ़ कर गायक
नव जीवन रच देने वाले
गान विश्व के कृती विधायक
कल्लोलित जिन की स्वर धारा
प्राण प्राण का बनी सहारा
फिर भी एक अकिंचन में क्यों
तुम ने स्वर संधान भर दिया
यह भी एक तुम्हारी लीला
नयन नयन के छवि संग्रह में
जगत्प्राण सी विहरणशीला
कब कुछ और कहाँ हो पाया
तम्हें घटित करना जो भाया
मिट्टी के पुतले में तुम ने
एक दिव्य अभिमान भर दिया
(रचना-काल
- 30-10-48)
◙◙◙
|