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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-21, फरवरी, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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इस अंक में पढ़िये

 

समकालीन कविताएँ

डॉ. रंजना अरगड़े शैलेन्द्र चौहान पंकज त्रिवेदी  

आकांक्षा यादव  स्वाति चढ्ढा गुलशन 

 

 

भाषांतर

उडिया कहानी

बहते बादल - नंदिनी शतपथी - अनुवादःराजेन्द्र मिश्र

किंतु कौन सुनेगा उसकी बात ? बचपन में राधा ने देखा है कि घर का सारा काम वही करती रही है। पर घर में खाने की कोई अच्छी चीज आती तो माँ पहले भैया और छोटे भाई-बहनों को देतीं। पर्व-त्यौहारों में जब पिता जी कपड़े लाते तो छटा-छटाया कपड़ा उसी के हिस्से में पड़ता।...

पंजाबी उपन्यास

रेत - (भाग-चार) हरजीत अटवाल - अनुवादः सुभाष नीरव

   

 

व्याकरण

एक शब्द - आँख - डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

 

 

मूल्याँकन

विनय पत्रिका:हमारे समय का क्रिटिक-परमानंद श्रीवास्तव

तुलसीदास एक बड़ी परंपरा के वाहक हैं ज़िसमें निराला के साथ नागार्जुन भी आएंगे। अगर आध्यात्मिक संताप के नज़रिए से देखा जाए तो मुक्तिबोध भी इसमें आएंगे। भक्ति-आंदोलन पर मुक्तिबोध की टिप्पणी के बावजूद इस आध्यात्मिक संताप-त्रास पर विचार किया जाना चाहिए।...

कविता में हाट बाज़ार -  परमानंद श्रीवास्तव

 

संस्कार

क नये समीक्षक...(सातवाँ भाग) - जार्ज बर्नार्ड शॉ 

वाइल्ड पर आपने बहुत बड़ा कुठाराघात किया है। उनका  ‘आइ हैव एण्ज्वॉएड माइसेल्फ वेरी मच में एक आइरिश मैन का अपना तौर-तरीका है। वे सारा श्रेय अभिनेताओं को दे देते हैं और लेखक के रूप में ख्याति बनाने का अपना तरीका अपनाते हैं। एलेक्जेण्डर द्वारा मेरी रचना को लेने के विषय में सभी स्तम्भ गलत हैं। इस मामले की सही बात सिर्फ इस सप्ताह के वर्ल्ड में है।

 

विचार वीथी

क्या साहित्य विफल है ? - अरुण प्रकाश

साहित्य के विभिन्न रूपों और विधाओं के बीच की सीमा-रेखाएँ धुँधली पड़ने लगी है। भाषा ख़ुद बदल रही है, नैतिक सवालों पर बहस जारी है, यद्यपि नैतिक समाधानों का प्रचलन नहीं रहा, विचारधारा की पकड़ ढ़ीली होती जा रही है तथा संशयवाद, संदेह और निराशा, अँधी आस्था, सुनिश्चित मताग्रहों और अस्पष्ट सामान्यीकरण की जगह लेते जा रहे हैं।...

 

प्रसंगवश

राजनीति निशाने पर 'भारत रत्न '- तनवीर जाफ़री

तात्पर्य यही निकलता है कि भारत रत्न जैसा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऐसे उच्चकोटि के व्यक्ति को दिया जाना चाहिए जो सर्वमान्य हो, आलोचनाओं का शिकार न हो तथा वास्तव में अपने महान व्यक्तित्व की बदौलत भारत के एक आकर्षक रत्न के रूप में चमकता हुआ दिखाई दे। परन्तु दु:ख की बात यह है कि अब शायद इस देश में ऐसे लोग चिरांग लेकर ढूँढने से भी नहीं मिल सकेंगे जोकि किसी न किसी कारण किसी न किसी व्यक्ति की आलोचना का केंद्र न हों।

 

कथोपकथन

तुलसी और कबीर को विरोधी बना दिया गया...

(विश्वनाथ त्रिपाठी से स्वप्निल प्रजापति की बातचीत)

लेनिन इसके बहुत बड़े उदाहरण हैं, टॉल्सटॉय को कुछ जो कम्युनिस्ट क्रिटिक थे, उन्होंने यूडल कहना शुरू कर दिया था। उन्होंने लेनिन से कहा कि टॉल्सटॉय जो थे सामंतवादी लेखक थे। लेनिन ने उनको डांटा और कहा कि ठीक है टॉल्सटॉय सामंत थे लेकिन इस सामंत लेखक के पहले रूसी साहित्य में किसान है ही नहीं।...

 

संस्मरण

प्रणाम - रवीन्द्र ठाकुर - महादेवी वर्मा

कितने कमलेश्वर ? -  डॉ.  सी. जय शंकर बाबू

प्रतिबद्ध बौद्धिक रचनाकार-शैलेन्द्र -  उदय प्रकाश

चेहरे की बनावट में मुस्कान -  संजीव बख्शी

 

शेष-विशेष

शोध....

हिंदी लघुकथा का विकास(भाग-5) - डॉ. अंजलि शर्मा

हस्ताक्षर...

बच्चन : गीत के पर्याय - बुद्धिनाथ मिश्र

मीडिया...

दक्षिण भारत में पत्रकारिता का उदय - जय शंकर बाबु

विज्ञान....

शरीर घड़ी ही चलाती है हमें - डॉ. विजय उपाध्याय

 

प्रवासी-पातियाँ

 इटली से...

ग्रिनजाने साहित्य पुरस्कार के बहाने - सुनील दीपक

 ब्रिटेन की चिट्ठी...

मकान की खिड़की - मोहन राणा

      

ललित निबंध

मुकदमेबाजी का मनोविज्ञान - विवेकी राय

कुछ शब्दों को सुनकर मन पर एक विचित्र प्रभाव पड़ता है। मुकदमेबाज़ी उन्हीं शब्दों में से एक है। यह एक धमाका है, विस्फोट है और जो इसका अभ्यस्त नहीं है, वह सुनते ही चौंक जायेगा, उसी प्रकार चौंक जायेगा, जैसे डाकू, पिस्तौल और कैंसर जैसे शब्द चौंका देते हैं, एक धक्का देते हैं। तब ऐसा क्यों होता है ? बात यह है कि यह शब्द एक बहुत बीहड़ जगह से जुड़ा है और वह जगह है कचहरी। यदि किसी सभ्य आदमी के लिए कहें कि यह व्यक्ति कचहरी-सेवी है अथवा मुकदमेबाज है तो वह बुरा मान जायेगा। कचहरी जिसका मोटा अर्थ न्यायालय है, क्यों इतनी बदनाम हुई ?...

 

कहानियाँ

मिचली - श्रीकांत वर्मा

कोशिश के बाद भी जब वह इस पर विश्वास नहीं कर सका तो जानने की कोशिश की कि आखिर वहाँ है क्या? दो-एक बार ताक-झाँक के बाद उसने पाया कि एक छोटा सा कमरा है, जिसके एक कोने में रसोई है और दूसरे कोने में एक पूरानी-सी मेज जिसके ठीक सामने दीवार पर एक कई साल पुराना कैलेंडर है और सिनेमावालों और हनुमान का एक चित्रा है। कमरे के बीचो-बीच एक छोटी खाट है। उसके बगल में एक उससे छोटी खाट और तीसरे कोने पर एक खटोली। कमरे का फर्श इतना गंदा है कि वह फर्श है या मिट्टी?

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एक कश्मीरी - कृष्ण कुमार यादव

मीटिंग का प्रथम दौर खत्म होते ही मैं भी उनके साथ हो लिया। चूंकि मेरी नियुक्ति अभी नई-नई थी, अत: उनके अनुभवों से काफी कुछ सीखने को मिलता । विभागीय बातों के अलावा भी दुनिया की तमाम चीज़ों पर मैं उनसे खुलकर बातें किया करता ।...

 

लघुकथाएँ

सोलह लघुकथाएँ - उषा जैन शीरी

 

कृति-समीक्षा

इन डिफेंस ऑफ फूड : एन ईटर्स मेनीफेस्टो/ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

कवि कथाकार विनोद कुमार शुक्ल / कमला प्रसाद

आलोचना, समय और साहित्य / रमेश चन्द्र शाह

जापानी पत्रिका में हिंदी साहित्य / सुरेश सलिल

 

 

ग्रंथालय में (ऑनलाइन किताबें)

कविता कोश - ललित कुमार

सर्वेश्वरदयाल और उनकी पत्रकारिता -शोध- संजय द्विवेदी

सैरन्ध्री - खंडकाव्य - मैथिलीशरण गुप्त

 होना ही चाहिए आँगन  - कविता - जयप्रकाश मानस

प्रिय कविताएँ - भगत सिंह सोनी

 

 

हलचल

(देश-विदेश की प्रमुख सांस्कृतिक गतिविधियाँ )

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा

विश्वनाथ तिवारी को प.बृजलाल द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान

बलिया में हजारीप्रसाद द्विवेदी जन्मशती समारोह

बिहार-झारखंड में महायुद्ध

भारतीय उच्‍चायोग, लन्‍दन द्वारा सम्‍मानों की घोषणा

 ◙ 30 वरिष्ठ रचनाकार एवं लघुकथाकार होंगे सम्मानित

 ◙ घुकथा पर पहला अंतरराष्ट्रीय विमर्श रायपुर में

 ◙ माणिकचंद्र बाजपेयी पुरस्कार भगवतीधर वाजपेयी को

 ◙ जावेद रज़ा का दूसरा मैं लोकार्पित

 ◙ हिंदी के ब्लॉगरों होंगे प्रतिवर्ष सम्मानित

 ◙ ड़ॉ.जे.आर.सोनी को अम्बेडकर कलाश्री अवार्ड 2007 

 ◙ गुरु घासीदास साहित्य अकादमी अवार्ड-07 जयप्रकाश मानस को

  

 पिछले माह से...

जनवरी 2008 -  त्रिलोचन विशेषांक

 

 

 आगामी आकर्षण

मार्च 2008 - अमेरिका का प्रवासी साहित्य

हमने पूर्व में ब्रिटेन में रची जा रही हिंदी कविताओं का एक विशेषांक निकाला था । इसी कड़ी में अमेरिका के प्रवासी साहित्य पर केंद्रित हो रहे हैं मार्च अंक में । इस अंक के अतिथि संपादक होंगे - डैलास के श्री आदित्य प्रकाश सिंह । प्रवासी रचनाकार  उनसे संपर्क कर सकते हैं  adityapsingh@aol.com पर ।

 

....आमंत्रण आप सभी को....

अंतरराष्ट्रीय लघुकथा सम्मेलन, रायपुर, छत्तीसगढ़

16-17 फरवरी, 2008

0 सृजन-सम्मान का प्रतिष्ठापूर्ण छठवाँ साहित्य महोत्सव 0

समारोह स्थल - दूधाधारी सत्संग भवन, मठपारा, रायपुर

विशेष-

- विमर्श(3 सत्र):इक्कीसवीं सदी में लघुकथा का भविष्य -

- अंतरराष्ट्रीय लघुकथा पाठ -

- लघुकथा