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बिहार-झारखंड
में महायुद्ध
पटना।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने
पटना पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ
पत्रकार श्रीकांत और प्रसन्न कुमार चौधरी की पुस्तक 1857
:
बिहार-झारखंड में महायुद्ध
के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 1857 के
स्वतंत्रता संग्राम से 1942 के बीच सूबे के अनगिनत लोगों ने
अपनी कुर्बानी दी, लेकिन इन
‘अनसंग
हीरोज’
की इतिहास में कहीं चर्चा नहीं है। अब हर जिले में ऐसे
‘अनसंग
हीरोज’
की खोज-खबर लेकर उनके योगदान का इतिहास लिखा जाएगा। जिले के
स्कूलों में भी बच्चों के बीच ऐसी पुस्तकों को पहुँचाया जाएगा
। जिले के स्कूलों में भी बच्चों के बीच ऐसी पुस्तकों को
पहुँचाया जाएगा ताकि आनेवाली
स्थित हार्डिंग पार्क को भी 1857 के स्वतंत्रता सेनानी बाबू
निशांत सिंह की पाँचवीं पीढ़ी के वंशज प्रभु नारायण सिंह और
जीववर सिंह के वंशज अजय कुमार सिंह को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि यह
काम पचास वर्ष पहले हो जाना चाहिए था। बाबू कुंवर सिंह के
योगदान को भी विहार के बाहर ठीक तरीके से नहीं रखा गया है।
बाकी स्वतंत्रता सेनानियों की भी चर्चा नहीं होती। उन्होंने
प्रधानमंत्री के साथ हुई एक बैठक में भी देश की लड़ाई के अनसंग
हीरोज का इतिहास लिए जाने की वकालत की थी। उन्होंने उम्मीद
जतायी कि पुस्तकों की खरीद के मामले में भी यह मेला देश में एक
नम्बर पर आ जाएगा।
पुस्तक ‘1857
:
बिहार झारखंड में महायुद्ध’
का लोकार्पण करते हुए प्रखर पत्रकार प्रभाष जोशी ने कहा कि
पटना पुस्तक मेले में जितने पढ़नेवाले लोग आते हैं, उतने
कोलकाता और दिल्ली के पुस्तक मेलों में भी नहीं आते । यहाँ के
लोग पत्र-पत्रिकाओं के सबसे बड़े पाठक और खरीददार हैं। पटना को
उन्होंने देश में पढ़ने का संस्कार देने वाली राजधानी करार
दिया। उन्होंने इस पुस्तक के बारे में बताया कि लगभग एक लाख
दस्तावेजों को खँगालने के बाद यह पुस्तक लोगों के सामने आई है.
इस अवसर पर
‘हिन्दुस्तान’
के स्थानीय संपादक सुनील दुबे ने भी लेखकों को बधाई दी और कहा
कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम पर और अधिक शोध होना चाहिए।
इतिहासकार ओ.पी. जायसवाल ने भी अपने विचार रखे। राजकमल प्रकाशन
समूह के प्रबंध निर्देशक अशोक महेश्वरी ने अपने वक्तव्य में इस
पुस्तक और बिहार से संबंधित अपने प्रकाशन समूह की भावी योजनाओं
के बारे में विस्तार से सारी जानकारियाँ दीं।
(प्रसन्न
कुमार चौधरी ‘श्रीकांत’
की रिपोर्ट)
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