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भारतीय
उच्चायोग, लन्दन द्वारा सम्मानों की घोषणा
लंदन ।
नागपुर में 10 जनवरी, 1975 को प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन
का आयोजन अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना थी और विदेश
मंत्रालय द्वारा इस दिन को भारत एवं भारत से बाहर विश्व
हिदी दिवस के रुप मनाने का निर्णय भी दूरदर्शितापूर्ण रहा ।
यूं तो भारत से अधिक भारत से बाहर विश्व हिन्दी दिवस के
प्रति उत्सुकता रही है लेकिन ब्रिटेन में इसके लिए कुछ
विशेष उमंग दिखी। इसीलिए जब पहली बार जब 2006 में लन्दन के
भारतीय उच्चायोग में विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाने लगा
तो यह सोचा गया कि इसे अविस्मरणीय कैसे बनाया जाए और तभी
योजना बनी कि ब्रिटेन में हिन्दी की सेवा कर रहे
व्यक्तियों एवं संस्थाओं को उच्चायोग की ओर से सम्मानित
किया जाए । महामहिम उच्चायुक्त श्री कमलेश शर्मा, तत्कालीन
उप उच्चायुक्त श्री रंजन मथाई और मंत्री (समन्वय) श्री रजत
बागची ने इस संकल्प को अपना समर्थन एवं आशीर्वाद दिया । फिर
क्या था भारत से बाहर, संभवत: सरकारी स्तर पर एक अनूठी एवं
उत्साहवर्धक पहल के रुप में शुरु किए गए चार हिन्दी सेवा
सम्मान । यह भी तय किया गया कि ये सम्मान प्रति वर्ष
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर दिए जाते रहेंगे ।
जिन चार
श्रेणियों के अन्तर्गत ये सम्मान दिए जाते हैं वे हैं :
हिन्दी शिक्षक, हिन्दी लेखक, हिन्दी मीडिया और
हिन्दी की स्वयंसेवी संस्थाएं । भारत और ब्रिटेन के लगभग
चार शताब्दी पुराने संबंधों को नई मजबूती देने के लिए और यह
देखते हुए कि ब्रिटेन के अनेकों विद्वानों ने भी हिन्दी
की महती सेवा की है, चार में से दो सम्मानों के नाम ब्रिटेन
के हिन्दी सेवियों और शेष दो सम्मानों के नाम भारत के
हिन्दी साहित्यकारों के नाम पर रखे गए । वर्ष 2007 में जब
पहली बार ये सम्मान दिए गए तो वह वर्ष जनप्रिय कवि
हरिवंशराय बच्चन का जन्म शताब्दी वर्ष भी था इसलिए
हिन्दी लेखन सम्मान उनके नाम पर; कालजयी पत्रिका सरस्वती
के सम्पादक के रुप में भारत में हिन्दी को एक निश्चित
स्वरुप प्रदान करने वाले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के
नाम पर हिन्दी पत्रकारिता सम्मान, कोलकाता में रॉयल
एशियाटिक सोसाइटी के माध्यम से हिन्दी शिक्षण को नयी राह
दिखाने वाले जॉन गिलक्रिस्ट के नाम पर हिन्दी
शिक्षण सम्मान और जीवन भर ब्रिटेन में हिन्दी के लिए
लड़ने वाले और अंत में लखनऊ में अंतिम सांस लेने वाले
फ्रैडरिक पिन्कॉट के नाम पर हिन्दी प्रचार प्रसार सम्मान
का नामकरण किया गया ।
विदेश मंत्रालय
से अपेक्षित सहयोग लगातार मिलता रहा और समय समय पर
मार्गदर्शन भी । इसी से कुछ और नए कार्यक्रम हाथ में लिए गए
हैं जिनकी सूचना समय समय पर आपको मिलती रहेगी । वर्ष 2007 के
लिए लन्दन,
भारत भवन में 16 फरवरी, 2008 को आयोजित किए जाने वाले एक
समारोह में जिन्हें सम्मान स्वरुप प्रशस्ति पत्र और
स्मृति चिह्न भेंट किये जाएँगे वे हैः-
1.
जॉन गिलक्रिस्ट यूके हिन्दी शिक्षण सम्मान :
इस सम्मान के लिए पेशे से सिविल इंजीनियर, कई बाल
पुस्तकों एवं हिन्दी पाठ्यपुस्तकों के रचयिता और
महालक्ष्मी विद्या भवन, लन्दन में हिन्दी के शिक्षक
वेद मित्र मोहला को चुना गया है ।
2.
डॉ.हरिवंश राय बच्चन यूके हिन्दी लेखन सम्मान :
इस श्रेणी के अन्तर्गत ब्रिटेन के ख्याति प्राप्त लेखक तेजेन्द्र
शर्मा को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया ।
3.
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी यूके हिन्दी पत्रकारिता
सम्मान :
ऑडियो/वीडिओ मीडिया में 05 नवम्बर, 1989 से अपने हिन्दी
प्रसारण के माध्यम से दक्षिण एशियाई श्रोताओं में अति
लोकप्रियता प्राप्त करने वाले सनराइज रेडियो को यह
सम्मान दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
4.
फ्रेडरिक पिन्काट यूके हिन्दी प्रचार प्रसार सम्मान :
हिन्दी के प्रचार प्रसार में लगी स्वयंसेवी संस्थाओं की
श्रेणी में वर्ष 2007 के लिए लन्दन की यू के हिन्दी
समिति का चयन किया गया है ।
(राकेश बी.
दुबे,अताशे (हिन्दी एवं संस्कृति),भारतीय उच्चायोग,
लन्दन की रिपोर्ट)
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