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वर्ष-3, अंक-27, अगस्त, 2008
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।। कविता ।।
भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा
युवा लेखन पुरस्कार से सम्मानित कवि की रचनाएँ
कुल की कथा
तुम सोनी हो
तुम्हारी माँ पहले बाम्हन थीं
बहन सोनी है
बाबा सुनार थे
दादी ठकुराने से थीं
पिता सोनी हैं।
मेरे बारे में जानकर क्या करोगे!
माँ धोबिन थीं
बहन काइथ है
बाबा काइथ थे
दादी नीच जात की थीं
पिता काइथ हैं।
और क्या बताऊँ अपने बारे में!
बुनता हूँ आदमी की पहचान
गुनता हूँ सुख-दु:ख
काशी के निकट।
रविकांत
पी-201, नेहरू इन्क्लेव
गोमती नगर, लखनऊ, (उ.प्र.)
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स्मरणीय
नागार्जुन
शमशेर बहादुर सिंह
पुरस्कृत
रविकांत की 10 कविताएँ
- लिखना ज़रूरी लगा मुझे
- बुरे दिनों में
- जीवन भीम, पलाशी
- संजीव हुसैन
- लंकेश और घोड़े
- यात्रा
- कुल की कथा
- माँ : दो कविताएँ
- चाय
- कविता
समकालीन कवि
देवांशु पाल
अनिल मिश्र
असद ज़ैदी
आशुतोष दुबे
विश्वरंजन
प्रवासी कलम
धवन भगत, डेनमार्क
- प्रयोग
- रिवाज़
- जीवन है प्रवाह
हरिहर झा, आल्ट्रेलिया
माह का कवि
फ़ज़ल इमाम मल्लिक
... बच्चा
... ख़ामोश हैं बच्चे
... ख़ौफ़ में डूबा शहर
... विंबलडन-2005
... ओवल पर बांग्लादेश
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