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भारतीय ज्ञानपीठ
द्वारा
युवा लेखन
पुरस्कार से सम्मानित कवि की रचनाएँ
बुरे दिनों में
कुछ लोगों को
अपने हाथ का गुड़ पसन्द नहीं होता
वे अपने अच्छे दिनों में
उदास रहते हैं।
कुछ लोग
अपने अच्छे दिनों का उपयोग करते हैं
और बचा नहीं रखते कुछ
अपने बुरे दिनों के लिए।
कुछ लोगों के अच्छे दिन
इतने अच्छे होते हैं कि
उन्हें अनुमान ही नहीं होता
कि आएँगे बुरे दिन।
कुछ लोग
अपने बुरे दिनों में खो देते हैं
अपने अच्छे दिन।
रविकांत
पी-201,
नेहरू इन्क्लेव
गोमती नगर,
लखनऊ, (उ.प्र.)
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