vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-27, अगस्त, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। कविता ।।

 

 

नाटक

 

समन्दर पार कँटीली झाड़ी के पीछे

झोपड़ी के आँगन में

भले सताती चिंताएँ और बढ़ती धड़कन

पर जहाँ मिलती थी

प्रेम की सौगात

चाहता तो ले लेता

हँसते हुए

लेकिन ठहराव से विद्रोह करके

यहाँ तो फँस गया दुविधा में

धुँधलाई शाम में बीयर की बोतल खुलने पर

चाँद ने

जब अँधियारे को चूमा

तो मेरी शान से सजाई हुई

बत्तियों को

अस्तित्व का ख़तरा नज़र आया

मैंने मुँह बिचका लिया

तन गई एक-एक नस

जिसकी थकान ही

लिख डालती सलवटें बिस्तर पर ।

 

जागते हुए देख रहा हूँ सपना कि

नींद नहीं आती डालर के नोटों पर

कितनी अच्छी थी बाजरे की रोटी

सरसों का साग

क्योंकि यहाँ पर

हर मुस्कान शिष्टाचार के विरूद्ध है

ख़ुश होने का अर्थ

देशद्रोह, एक घमंड, एक पाखंड

जो कविता की आत्मा के ख़िलाफ़ है

तो भीगो ले अपने तकिये

स्वार्थ पर प्रेम की और

देह पर आत्मा की जीत के लिए

भोग पर अध्यात्म की जीत के लिए

रोना न आये तो रो ले

ग्लीसरीन लगाकर !

समझ ले टपकते आँसू एक सस्कृति हैं ।

  हरिहर झा

2, बिल्बी स्ट्रीट, मोराबिन,

मेल्बर्न, आस्ट्रेलिया - 3189

 ◙◙◙

 

स्मरणीय

नागार्जुन

शमशेर बहादुर सिंह

पुरस्कृत

रविकांत की 10 कविताएँ

- लिखना ज़रूरी लगा मुझे

- बुरे दिनों में

- जीवन भीम, पलाशी

- संजीव हुसैन

- लंकेश और घोड़े

- यात्रा

- कुल की कथा

- माँ :  दो कविताएँ

- चाय

- कविता

समकालीन कवि

देवांशु पाल

अनिल मिश्र

असद ज़ैदी

आशुतोष दुबे

विश्वरंजन

प्रवासी कलम

धवन भगत, डेनमार्क

- प्रयोग

- रिवाज़

- जीवन है प्रवाह

हरिहर झा, आल्ट्रेलिया

माह का कवि

फ़ज़ल इमाम मल्लिक

... बच्चा

... ख़ामोश हैं बच्चे

... ख़ौफ़ में डूबा शहर

...  विंबलडन-2005

...  ओवल पर बांग्लादेश

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google