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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-27, अगस्त, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। गीत ।।

 

 

मौसम की पहली बारिश

 

छ्म छम छम दहलीज़ पे आई मौसम की पहली बारिश

गूंज उठी जैसे शहनाई मौसम की पहली बारिश

 

जब तेरा आँचल लहराया

सारी दुनिया चहक उठी

बूंदों की सरगोशी तो

सोंधी मिट्टी महक उठी

मस्ती बनकर दिल में छाई मौसम की पहली बारिश

 

रौनक़ तुझसे बाज़ारों में

चहल पहल है गलियों में

फूलों में मुस्कान है तुझसे

और तबस्सुम कलियों में

झूम रही तुझसे पुरवाई मौसम की पहली बारिश

 

पेड़-परिन्दें, सड़कें, राही

गर्मी से बेहाल थे कल

सबके ऊपर मेहरबान हैं

आज घटाएँ और बादल

राहत की बौछारें लाई मौसम की पहली बारिश

 

आँगन के पानी में मिलकर

बच्चे नाव चलाते हैं

छत से पानी टपक रहा है

फिर भी सब मुस्काते हैं

हरी भरी सौग़ातें लाई मौसम की पहली बारिश

 

सरक गया जब रात का घूँघट

चांद अचानक मुस्काया

उस पल हमदम तेरा चेहरा

याद बहुत हमको आया

कसक उठी बनकर तनहाई मौसम की पहली बारिश

   देवमणि पांडेय

ए-2, हैदराबाद एस्टेट, मालाबार हिल,

नेपियन सी रोड, मुम्बई - 400 036

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माह का छंदकार

शरद सिंह

- सुरों में ढली हुई लड़की

- सपनों में डूबी लड़की

- अपनी चाह कहो लड़की

- मधुशाला उजड़ी है

- शीतल लहरें सोच रही हैं

ग़ज़ल

बेकल' उत्साही

ज़िया ज़मीर

विनीता गुप्ता

डॉ. महेन्द्र अग्रवाल

अमर ज्योति

गीत

देवमणि पांडेय

डॉ. दीप्ति गुप्ता

डॉ. दिवाकर वर्मा

हृदयेश्वर

दोहा

डॉ. रामनिवास मानव

 अजय गाथा

इंदप्रस्थ बदनाम है

 

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