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सुरों में ढली हुई है लड़की
मेरे दिल में
रहती थी जो, कहाँ ग़ुमी है वो लड़की।
जीवन में
धुंधलापन छाया, धुँआ हुई है वो लड़की।
उसके हाथों की
रेखाएँ सपने बुनती रहती थीं
सबने समझा
क़िस्मत की तो बहुत धनी है है वो लड़की।
उसके कंगन, उसके
झुमके ढाई आखर पर बजते
सब कहते थे सात -
सुरों में ढली हुई है वो लड़की।
दुनिया भर की
चिन्ताओं से सदा बेख़बर रहती थी
लगता है उन
चिन्ताओं से त्रस्त हुई है वो लड़की।
अपने मन में ख़ूब
तलाशा, मुझे कहीं भी नहीं मिली
कहते हैं सब,
मेरे भीतर छुपी हुई है वो लड़की।
डॉ. सुश्री शरद
सिंह
एम-111,
शांतिविहार,
रजाखेड़ी,
सागर (म.प्र.)
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470004
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