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दिल वो दुखा कि यार बस
देखी नहीं सुनी नहीं ऐसा वफ़ा कि यार बस ।
वादे पे मेरे शख़्स वो ऐसे जिया कि यार बस ।
चाहीं मोहब्बतें अगर उससे तमाम उम्र की
सन्दली हाथ, हाथ पर ऐसे रखा कि यार बस ।
ज़हन में यूँ ही आ गया तेरा ख़्याल एक शब
तारों से सारा आसमां ऐसा सजा कि यार बस ।
मैंने ज़रा-सी देर ही देखा था यार को अभी
जाने वो क्यों सिमट गया कहने लगा कि यार बस ।
बस इक नज़र की बात थी जिसने तबाह कर दिया
दिल इक था जिस पे नाज़ था ऐसा लुटा किया यार बस ।
होने को और भी बहुत हमसे हुए जुदा मगर
तू जो ज़रा जुदा हुआ दिल वो दुखा कि यार बस ।
उसने कहा सुनो 'ज़िया'
सज-धज के कुछ रहा कर
मुझको न जाने क्या हुआ ऐसा सजा कि यार बस ।
ज़िया ज़मीर
निकट ज़ैन बुक
डिपो
चौकी हसन खां,
मुरादाबाद - 244001
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