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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-27, अगस्त, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। ग़ज़ल ।।

 

 

अपनी तासीर बता

 

क्या हुआ क्या न हुआ तुझको मयस्सर न बता ।

अपनी तासीर बता अपना मुकद्दर न बता ।

 

मान लूँगा मैं तुझे क़द के बराबर अपने

शायरी सीख मगर ख़ुद को सुखनवर न बता ।

 

आज की रात ठहर घर मे न दीवार उठा

आख़िरी वक़्त बुजुर्गों को ये मंज़र न बता ।

 

आज तहज़ीब न दहलीज पे रख दे गुरबत

गाँव तेरा है ख़ुदा ऐसा कोई घर न बता ।

 

कुछ हुकूमत के नए रंग चढ़े हैं तुझ पर

तू सिकन्दर है अभी ख़ुद को पयम्बर न बता ।

 

ये हक़ीक़त कहीं आँखों में न भर दे आँसू

देखना यूँ तो ज़रूरी है बहुत, पर न बता । 

 

प्यास मुद्दत से यही जिस्म को बरते आदम

यार दोज़ख के हमें साँप छछूंदर न बता ।

   डॉ. महेन्द्र अग्रवाल

संपादक-नई ग़ज़ल

रामेश्वरम् सदर बाज़ार, शिवपुरी, मध्यप्रदेश

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माह का छंदकार

शरद सिंह

- सुरों में ढली हुई लड़की

- सपनों में डूबी लड़की

- अपनी चाह कहो लड़की

- मधुशाला उजड़ी है

- शीतल लहरें सोच रही हैं

ग़ज़ल

बेकल' उत्साही

ज़िया ज़मीर

विनीता गुप्ता

डॉ. महेन्द्र अग्रवाल

अमर ज्योति

गीत

देवमणि पांडेय

डॉ. दीप्ति गुप्ता

डॉ. दिवाकर वर्मा

हृदयेश्वर

दोहा

डॉ. रामनिवास मानव

 अजय गाथा

इंदप्रस्थ बदनाम है

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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