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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

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।। पुस्तकायन ।।

 

 

 हज़ार किताबों का स्वाद एक जगह


डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

 

अँगरेज़ी प्रकाशन जगत् में ऐसी किताबों की एक दिलचस्प परम्परा है जो यह सुझाती हैं कि आपको दुनिया से विदा होने से पहले ये हज़ार जगहें देख लेनी चाहिए, ये हज़ार फ़िल्में देख लेनी चाहिए, ये हज़ार किताबें पढ़ डालनी चाहिए, वगैरह। कहना अनावश्यक है कि यह चुनिन्दा को प्रस्तुत करने की एक शैली है। इसी परम्परा की एक कडी के रूप में हाल ही में आई है 1001 बुक्स : यू मस्ट रीड बिफोर यू डाइ । इस तरह के किसी भी संकलन को आप जब हाथ में लेते हैं तो पहला काम यह करते हैं कि अपनी बनाई हुई सूची से संकलनकर्ता की सूची की तुलना करते हैं। हरेक की सूची अलग होती है। संकलक की भी। पाठक की सूची के बहुत सारे नाम संकलक की सूची से गायब होते हैं। पाठक के नाराज़ होने के लिए इतना काफी होता है। पीटर बोक्साल्ल द्वारा सम्पादित लगभग हज़ार पन्नों के इस भारी भरकम संकलन के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। किसी को यह शिकायत है कि इसमें कार्सन मैक्क्युलर्स अनुपस्थित हैं तो कोई रे ब्रेडबरी को न पाकर क्रुद्ध है। किसी की शिकायत यह है कि इसमें बाल साहित्य को शामिल क्यों नहीं किया गया है तो कोई नोबल पुरस्कार विजेता ओरहान पामुक और नगीब महफूज़ को न पाकर क्षुब्ध है। 37 में से 20 बुकर पुरस्कृत लेखक हैं तो शेष 17 के प्रशंसक तो नाराज़ होंगे ही।

 

किसी की नाराज़गी सही लेखक की कम महत्वपूर्ण पुस्तक के चयन को लेकर है तो किसी को यह उचित नहीं लग रहा कि एक ही लेखक की तीन-तीन पुस्तकें शामिल कर ली गई हैं। बहुतों की शिकायत यह है कि सम्पादकीय चयन इस बात से प्रभावित हुआ है कि किसी औसत दर्ज़े की पुस्तक पर उत्कृष्ट फ़िल्म बनी थी, इसलिए उस पुस्तक को भी इस चयन में शुमार कर लिया गया है। उनके लिहाज़ से यह बेहतर होता कि उस उत्कृष्ट फ़िल्म का ज़िक्र इसी प्रकाशक के एक अन्य प्रकाशन 1001 मूवीज़ : यू मस्ट सी बिफोर यू डाइ में कर लिया जाता।

 

लेकिन जैसा मैंने कहा, इस तरह की शिकायत ऐसे हर संकलन के साथ होना अवश्यम्भावी है। कोई भी चयन कभी भी सर्वसम्मत नहीं हो सकता। बावज़ूद इसके, क्या यह कम महत्वपूर्ण है कि यहाँ एक हज़ार एक उत्कृष्ट पुस्तकों में से हरेक का परिचय लगभग तीन-तीन सौ शब्दों में मौज़ूद है। न केवल सार-संक्षेप देता हुआ परिचय, बल्कि मूल पुस्तक का आवरण, उसके पोस्टरों की छवियाँ, पुस्तक और लेखक के बारे में अल्पज्ञात बातें और यथासम्भव कुछ उद्धरण भी। किताब में करीब छह सौ तो रंगीन चित्र ही हैं। कल्पना करें कि आपके पास पर्याप्त पैसा हो और इतना समय भी कि आप हर सप्ताह एक किताब पढ़ कर पूरी कर लें, तो इस चयन की सारी किताबें कितने समय में पढ़ पायेंगे? आपको यह काम करने में मात्र सवा उन्नीस बरस लगेंगे! और याद रखिए, हर किताब एक सप्ताह में नहीं पढी जा सकती। डोरोथी रिचार्डसन का ‘पिल्ग्रिमेज’ हज़ारों पन्नों में 13 भागों में है, और भी ऐसी अनेक किताबें यहाँ हैं।

 

आप कहेंगे कि महज़ तीन सौ शब्दों का सार-संक्षेप भला पूरी किताब का अनुभव कैसे दे पाएगा? मैं भी मानता हूँ कि यह संकलन मूल किताब का विकल्प नहीं है। लेकिन, आज जब दुनिया में सबके पास समय का अभाव होता जा रहा है और बहुतों के पास साधनों और सुविधाओं की भी इफ़रात नहीं है, यह प्रयास महत्वपूर्ण लगता है। यह संकलन हममें से अनेक के लिए अनेक किताबों को पढ़ने के लिए एक प्रस्थान बिन्दु का काम कर सकता है। आप यहाँ डब्ल्यू। जी। सीबाल्ड की ‘द एमीग्रेण्ट्स’ के बारे में या काजुओ इशिगुरो की ‘नेवर लेट मी गो’ के बारे में पढ़कर उन्हें मूल रूप में पढ़ने के लिए व्याकुल हो उठते हैं। इस किताब को पढ़ने के बाद आप ख़ुद एक सूची बनाते हैं कि ये किताबें तो ज़रूर ही पढ़नी हैं। यही बात कम महत्वपूर्ण नहीं है। वस्तुत: यह किताब मूल किताब की एक झाँकी दिखाते हुए आपको यह तय करने का अवसर देती है कि आप उस किताब को पूरा पढ़ना चाहेंगे अथवा नहीं!

 

यह किताब उस तरह की किताबों में से है जिसे कवर टू कवर पढा जाना आवश्यक नहीं है। इसे कहीं से भी, कभी भी पढा जा सकता है।यह किताब आपको साहित्य के परिदृश्य का विहँगावलोकन  तो करा ही देती है। मैंने इस किताब को चर्चा के लिए इस कारण चुना है कि यह आपकी भविष्य में पढी जाने वाली किताबों की सूची में अनेक नाम जोड़ती है और इसलिए भी चुना है कि मैं जानता हूँ कि मेरे आदरणीय पाठकगण भी अब अपनी-अपनी पसन्द की किताबों (और जगहों और फ़िल्मों) की ऐसी ही सूचियाँ बनाएंगे और उनकी चर्चा अपने मित्रों से करेंगे। अगर वे मुझे भी अपनी सूचियां भेज सकें तो मज़ा आ जाए।

 

डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

ई-2/211, चित्रकूट

जयपुर, राजस्थान - 302021 -

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पुस्तक

1001 Books: You Must Read Before You Die (Paperback)

पृष्ठ

960

मूल्य

£ 20.00 डॉलर

प्रकाशक

Cassell Illustrated

समीक्षक

डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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