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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

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।। कविता ।।

 

 

रिश्तों का अर्थशास्त्र

 

रिश्तों के बदलते मायने

अब वे अहसास नहीं रहे

बन गये अहम् की पोटली

ठीक अर्थशास्त्र के नियमों की तरह

त्याग की बजाय माँग पर आधारित

हानि और लाभ पर आधारित

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव

की तरह दरकते रिश्ते

ठीक वैसे ही

जैसे किसी उद्योगपति ने

बेच दी हो घाटे वाली कम्पनी

बिना समझे किसी के मर्म को

वैसे ही टूटते हैं रिश्ते

आज के समाज में

और अहसास पर

हावी होता जाता है अहम्

 

    कृष्ण कुमार यादव

वरिष्ठ डाक अधीक्षक

कानपुर नगर मण्डल, कानपुर (उ0 प्र0) - 208001

  ◙◙◙

 

माह के कवि

 

- ई-पार्क

- गौरेया

- गुर्दा

-  पेज थ्री

- रिश्तों का अर्थशास्त्र

- विज्ञापनों का गोरखधंधा

 

 

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तकनीकः प्रशांत रथ

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