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गुर्दा
निकाल लिया है उन्होंने
उसका एक गुर्दा धोखे से
उस बेरोज़गार
ने भी
चंद पैसों के लालच में
लगा दी अपनी
ज़िंदगी
दाँव पर
उसका क्या कसूर
?
वह तो व्यवस्था का मारा हुआ है
उस संभ्रान्त और सुशिक्षित डॉक्टर का क्या
जिसे दूसरा भगवान माना जाता है
जिसने एक अमीर की जान बचाने
एक गरीब की
ज़िंदगी
दाँव पर लगा दी
न जाने रोज़
कितनी ऐसी घटनायें
सुनने को मिलती हैं
कभी पैसे के अभाव में
किसी गरीब का दम तोड़ देना
कभी चंद पैसों की आड़ में
नवजात शिशु को बेच देना
और कभी कानूनी प्रक्रियाओं में
भटकाये जाते आम जन
पर फिर भी गरीब आदमी
मानता है उन्हें दूसरा भगवान।
कृष्ण कुमार यादव
वरिष्ठ डाक
अधीक्षक
कानपुर नगर मण्डल,
कानपुर (उ0
प्र0)
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2080011
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