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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। गीत ।।

 

 

आँसू का इतिहास

 

सबके अपने दृष्टिकोण हैं,

क़सद है, अहसास है,

किसे मयस्सर खुशी यहाँ पर ?

सब झूठा आभास है।

 

एक पंक्ति में लिखी सफलता,

चार पंक्ति में लिखी विकलता।

तेरा, मेरा, सबका जीवन,

आँसू का इतिहास है।

 

सबको एक समंदर,

अपने पास बुलाता है।

किन्तु वहाँ का रस्ता,

मरघट होकर जाता है।

 

सबकी अपनी-अपनी राहें,

आधी और अधूरी चाहें।

आँखों में सपने, अधरों पर

जनम-जनम की प्यास है।

 

स्वप्नों के बंधन को तोड़े,

विपदाओं का पानी।

अग्निपरीक्षा के बिन पूरी,

होती नहीं कहानी।

 

प्रारब्धों या संतापों की,

पुण्य-फलों की अभिशापों की।

रामकथा है जिसमें चौदह,

वर्षों का वनवास है।

 

जगती के अनुदार पथों का,

साथी केवल दुख है।

नहीं दीखता किंतु क्षणिक भर,

कहलाता जो सुख है।

 

कुछ को मंज़िल तक जाना है,

कुछ को पीछे रह जाना है।

चलना सबकी नियति लिखी है,

लेकिन हृदय हताश है।

    डॉ. अजय पाठक

 लेन-3, विनोबा नगर,

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) - 495001

  ◙◙◙

 

गीतकार

- माह के गीतकार - डॉ. अजय पाठक

- आँसू का इतिहास

- रात गहरी है

- मौसम विद्रुप

- प्रतिकार करूँगा

- देहरी पर दीप रख दो

- ओम निश्चल

- डॉ. तारादत्त निर्विरोध

- नारायण लाल परमार

-  मयंक श्रीवास्तव

- डॉ. महेन्द्र भटनागर

 

 

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