 |
आँसू का इतिहास
सबके अपने दृष्टिकोण हैं,
मक़सद
है,
अहसास है,
किसे मयस्सर खुशी यहाँ
पर
?
सब झूठा आभास है।
एक पंक्ति में लिखी सफलता,
चार पंक्ति में लिखी विकलता।
तेरा,
मेरा, सबका जीवन,
आँसू
का इतिहास है।
सबको एक समंदर,
अपने पास बुलाता है।
किन्तु वहाँ
का रस्ता,
मरघट होकर जाता है।
सबकी अपनी-अपनी राहें,
आधी और अधूरी चाहें।
आँखों
में सपने,
अधरों पर
जनम-जनम की प्यास है।
स्वप्नों
के
बंधन
को
तोड़े,
विपदाओं का पानी।
अग्निपरीक्षा के बिन पूरी,
होती नहीं कहानी।
प्रारब्धों या संतापों की,
पुण्य-फलों की अभिशापों की।
रामकथा है जिसमें चौदह,
वर्षों का वनवास है।
जगती के अनुदार पथों का,
साथी केवल दुख है।
नहीं दीखता किंतु क्षणिक भर,
कहलाता जो सुख है।
कुछ को मंज़िल
तक जाना है,
कुछ को पीछे रह जाना है।
चलना सबकी नियति लिखी है,
लेकिन हृदय हताश है।
डॉ. अजय पाठक
लेन-3,
विनोबा नगर,
बिलासपुर
(छत्तीसगढ़)
- 495001
◙◙◙
|