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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

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।। भाषांतर ।।

 

 

लेनिन


केयूर भूषण

 

ठोकर खाना-गिरना-भूल जाने के लिए

भूल जाना और अपनी बुद्धि फैलाना

लेनिन, नाम भर नहीं, रास्ता है

झट से पहचान लो

रास्ता पकड़ लो

पहुँच जाओगे मित्र तुरत-फुरत हाट ।

 

लेनिन, मनुष्य नहीं एक चमकता हुआ तारा है

घने अंधियारे में,

बाघ, भालुओं का खन्दक मोड़

समूचे रास्ते पर काँटे-कँटियार

हाथ पर हाथ धरे, अदृश्य

उगा है धीरज बँधाने के लिए

मित्र, डरना नहीं, प्रभात होने ही वाला है।

 

लेनिन, बनिहारों मज़दूरों का हँसिया है

बैलों के बिक जाने के बाद

भूमि के बंधक रखे जाने के बाद

उपजाया हुआ धान

सेठों की कोठियों में रखाने पर

सलामत रह गया हँसिया, पेट पालने के लिए,

मज़दूरी करने के लिए।

 

मुड़ा हुआ चाँद-सा हँसिया है

मज़दूरों के कमर में खौंसा हुआ,

अपनी भूमि को पहचान लिया

खेतों पर मालकिन के टपके हुए बूंद पसीनों का।

सुगंध से सराबोर धान की बालियों को

सीधे के लिए सीधा है, उल्टों के लिए उल्टा

धडधड़ाते हुए काटने लगे

मज़दूरिनों के भाड़ा के लिए।

 

हँसिया, तुम्हारा मित्र है

मत भूलना मित्र।

इसे संभाल कर रखना।

 

मूल छत्तीसगढ़ी से हिन्दी अनुवाद - भगतसिंह सोनी

(कवितासंग्रह लहर से साभार)

 

 

  भगत सिंह सोनी

रायपुर, छत्तीसगढ़

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