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सृजनगाथा

 

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वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

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।। बचपन ।।

 

  

बाल कहानी

बहादुरी


उत्कर्ष पाण्डेय 'गुलशन'

 

हिमाचल की पहाडियों के पास एक नदी थी जिसके पास से गुज़रते  हुए लोग हिमाचल की पहाडियों का मज़ा लेते थे। नदी के पास एक पुराना पीपल का पेड़ था। पीपल का पेड़े से उसके बगल के गाँव को लोग पिपरा के नाम से जानते थे। इस गाँव में आदिवासियों की बस्ती थी जिसमें लखन नाम का एक बच्चा रहता था जो अपने पिता की मृत्यु के बाद दिन भर नाव चलाकर घर का सारा खर्च उठाता था। उस के साथ उस की माँ और उस की छोटी बहन रहती थी।

 

एक दिन लखन सुबह-सुबह उठकर काम पर निकल गया। जब वह नदी के पास पहुँचा तो उसे अपने नाव पर बैठाने के लिए तीन सवारियाँ मिलीं। उन तीन सवारियों में माँ-बाप और उनका एक आठ साल का लड़का था। नाव में बेठने के बाद लड़के के पिता ने अपने लड़के को अपनी गोद में बैठा लिया। यह देखकर लखन की आँखें भर आयीं। वह सोचने लगा कि अगर मेरे भी पिता ज़िंदा होते तो वे भी मुझे इसी तरह प्यार करते । यह सोचते-सोचते लखन की नाव नदी के बीचों-बीच जा पहुँची । तभी अकस्मात् हवा के तेज़ झोंके और ज़ोर की लहरों से लखन की नाव डगमगा गयी और उन का लड़का हाथ से छुटकर पानी में गिर पड़ा। वे ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगे कि मेरे बेटे को बचा लो मगर वहाँ बचाने के लिए कोई नहीं आया।

 

लखन नाव को झट से किनारे लगाकर नदी में कूद पड़ा। तभी लड़के का सिर देखकर वह तैरकर उसके पास पहुँचा और उसे निकाल कर बाहर ले आया । लड़के की साँस धीरे-धीरे चल रही थी और वह काफी पानी भी पी चुका था। लखन ने उसे पेट के बल लिया दिया और पेट दबाकर उसके मुँह से पानी निकाला । अब लड़के को थोड़ा-थोड़ा होश आ चुका था। लड़के के माँ-बाप अपने बच्चे को पाकर बहुत खुश हुए और लखन को ढेरों आशीर्वाद दे डाला।

 

अब दिन ढलने लगा था और उन्हें दूर जाता था इसलिए लखन उन्हें अपने घर ले आया। जब लखने घर पहुँचा तो उसकी माँ ने उससे देर से आने का कारण पूछा। लखन ने सारी घटना को जब माँ से बताया तो माँ रोने लगी और कहने लगी कि बेटा, अगर तुझे कुछ हो जाता तो मेरा क्या होता ? लखन ने कहा कि माँ अगर में नदी में कूदकर उस बच्चे की जान न बचाता तो वह बच्चा भी न बचता। उस बच्चे में मुझे अपना रूप और जीवन दिखाई दे रहा था, इसलिए मुझसे रहा न गया और में उसे बचाने के लिए नदी में कूद पड़ा। उसे बचाकर मुझे लगा कि जैसे मैंने ख़ुद अपने आप को बचाया है, उसे नहीं।

  उत्कर्ष पांडेय 'गुलशन'

द्वारा डॉ. अशोक गुलशन

               उत्तरी कानूनगोपुरा, बहराइच (उ.प्र.)

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