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श्वेताए दिन
श्वेत कपोतों-से,
श्वेताए दिन ।
धूप सने हाथों से, ओस का आचमन ।
पूजा की थाली में, दीपक का उजलापन ।
कर्पूरी गंध रचे,
महकाएँ दिन ।
अलसाई आँखों में, सपनों का काजल ।
देहरी को लाँघ रहे, छितराए बादल ।
चंदन-सी पावन अब,
ये ऋचाएँ दिन ।
अल्हड़ हवाओं ने, दस्तक की द्वार पर ।
किरणों की झिलमिल है, नदियों की धार पर ।
कोपली इरादों-सी,
भावनाएँ दिन ।
अशोक
गीते
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