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धूप नज़र आए
भले हाद्सों की दुनिया
में परचम लहराए ।
मगर भरोसा है शायद हालात सुधर जाए ।
धुआँ छुपाले सूरज को इतना दमदार नहीं
तेज़ निगाहें रखें अगर तो धूप नज़र आए ।
निर्विकार चेहरे हैं कितने बदहवास चेहरे
असली की परखें तो नकली आप उतर जाए ।
आँखें अंधी कान हैं बहरे और जीभ गूँगी
कुछ तो हिम्मत करें कि सबमें प्राण नज़र आए ।
शोक गीत के लिए सिर्फ़ अनुबंधित क्यों हैं हम
मंगल गान ही गाए केवल कंठ अगर गाए ।
विजय राठौर
शासकीय कन्या स्कूल के
सामने
जांजगीर, छत्तीसगढ़ -
495668
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