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रफ़्तार से पाँव पसारता हुआ ‘रफ़्तार’ जयप्रकाश मानस
(हिंदी का पहला संपूर्ण सर्च इंजन)
बाजपेयी बताते हैं कि भारतीय ग्रामीण अँग्रेज़ी नहीं जानते जबकि कंप्यूटर और इंटरनेट का सारा काम लगभग अंग्रेजी में होता है । इसलिए उन्होंने ऐसे सर्च इंजन ईजाद करने की ज़रूरत महसूस की । सच भी है कि बहुराष्ट्रीय कंपनी भला क्यों हिंदी पर स्वयं को फोकस करेंगे । मात्र लिखना पढ़ना आता हो । सभी तरह के वेबसाइट खुल जाते हैं। यह खोज यंत्र या सर्च इंजन उन अँग्रेज़ीदां एवं हितनिष्ठ लोगों के लिए करारा जबाब है जो आम हिंदी भाषी कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं को हतोत्साहित करते रहते हैं कि ज्ञान और विज्ञान के लिए हिंदी अक्षम है, कि वह दोयम दर्ज़े की दक्षता वाली भाषा है । जबकि वास्तविकता यही है कि ऐसा करते वक़्त ऐसे लोग प्रकारांतर से अँग्रेज़ी और अँग्रेज़ी संस्कृति की चालाकीपूर्ण समृद्धि की चालें चलते रहते हैं ।
इंटरनेट पर हिंदी पठन, पाठन और लेखन की चर्चा छिड़ते ही एक निराशा सी छा जाती है । आम हिंदीभाषी अंतरजाल उपभोक्ता हाथ मलते हुए रह जाता है । कंप्यूटर और इंटरनेट पर हिदीं से जुड़ी सबसे बड़ी परेशानी फॉन्ट की रही है । बहुत सी साइट डायनामिक फॉन्ट पर बनी हैं जिस कारण उन पर खोज करना नामुमकिन था । एक जानकारी के अनुसार यह जानकारी लगभग 500 तरह के फोंट में इंटरनेट पर तितर-बितर पड़ी है । अन्य सर्च इंजनों की तुलना में रफ़्तार एकमात्र ऐसा खोजयंत्र है जो हर तरह के फांट पर बनी साइट को खोज सकता है । रफ़्तार डॉट कॉम में साधारण हिंदी से जुड़ी साइट के अलावा कैटेगरी सर्च टूल का प्रयोग कर भाषा, धर्म, कृषि, खेल, ब्लॉग, साहित्य, मनोरंजन, समाचार और भी बहुत कुछ पाया जा सकता है, वह भी सिर्फ एक क्लिक पर । इस टूल की मदद से सर्च का सफ़र छोटा करते हुए सीधे सर्च मंजिल पर पहुँचा जा सकता है । रफ़्तार.कॉम की एक और विशिष्टता उसका टायपिंग टूल है जो कीबोर्ड पर कुछ भी टंकण करने पर हिंदी में प्रदर्शित करता है । यह न सिर्फ भारत के ही पन्नों जो यूनिकोड़ित हैं बल्कि संसार भार के सभी हिंदी पन्नों को भी सर्च करता है । अपने अनेक विशिष्टताओं व आधुनिक तकनीक से सुसज्जित रफ़्तार बड़ी रफ़्तार से अपने पंख पसार रहा है । पीयूष बाजपेयी जैसे भारतीय मनीषा को बधाई दिया जाना चाहिए कि जिन्होंने अंग्रेज़ी का दामन थामने से बचाते हुए रफ़तार जैसा प्रिय चीज हिंदीप्रेमियों के हाथों सौंप दी है । विश्वास किया जाना चाहिए कि भविष्य में यह शब्दों के साथ चित्र आदि भी खोजने में मदद करने लायक बन जायेगा । जो भी हो रफ़्तार जैसे उद्यमों के सहारे ही अब आम भारतीयों को समझाया जा सकता है कि भई कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी प्रौद्योगिकी अँग्रेजी की बपौती नहीं और न ही किसी एक भाषा का नियंत्रण उस पर हो सकता है, नियंत्रित उपयोग तो उसी भाषा समूह वाले कर सकते हैं जो उसे अपनी भाषा में समृद्ध देखना चाहते हैं, उसके सहारे अपनी भाषा को समृद्ध करना भी चाहते हैं – संपूर्ण उत्तरदायित्व के साथ । भई, हम तो रफ़्तार के साथ ही हैं, आप क्यों देरी कर रहे हैं ?
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