साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच                                                                             SRIJANGATHA

।।सृजनगाथा।।

 

  ई-पताः srijangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

तकनीक

 

पिटारा टूल बार यानी हिंदी का संपूर्ण संसार


जयप्रकाश मानस

 

 

भी अकल्पनीय था कि इंटरनेट के किसी ब्राऊजर से सीधे हिंदी का सब कुछ पढ़ा, लिखा और सुना भी जा सकता है । पर अब इसे सच साबित कर दिखाया है युवा वेब डेव्हलपर जगदीश भाटिया ने । उनके सर्वसुविधायुक्त और पूर्ण सफल पिटारा हिंदी टूल बार से हिंदी को नया विस्तार मिला है । सच कहें तो प्रौद्योगिकी के सहारे हिंदी चारों दिशाओं में एक क़दम और आगे बढ़ चुकी है। और यह भी सच मानिए कि यह सब बिलकुल मुफ़्त है । इसके लिए आपको मात्र 824 केव्ही वाला एक सरल डाउनलोड़ करना होगा । http://hindiblog.ourtoolbar.com/ पर जाकर, टूलबार या download.com और कुछ नहीं - एक तरह का हिंदी इंटरनेट ब्राउजर तैयार समझिए । यह टूलबार इंटेरनेट पर हिंदी में लिखने और पढ़ने वालों के लिये बहुत ही काम का टूल है। इसमें आपको हिंदी की सभी साइट्स के लिंक मिलते है इसके अलावा चिट्ठासर्च, हिंदी लिखने में सहायता, एक क्लिक पर नारद, परिचर्चा और चिट्ठाचर्चा, सभी हिंदी पत्रिकाओं के लिंक, सभी हिंदी के लिंक, एग्रीगेटरों के लिंक, क्रिकेट का स्कोरकार्ड, ऑनलाइन रेडियो, पॉप अप ब्लॉकर, इमेल नोटिफायर, गुगल समाचार और नारद के आर एस एस लाइव फीड, गुगल पेज रेंक, बुकमार्क करने की सुविधा, कुछ चिट्ठों के लिंक, बहुत से गजेट्स जैसे कि आपके शहर का मौसम और लाइव टीवी भी शामिल हैं । इसे रचा है जगदीश भाटिया ने ।

 

दिल्ली में जन्मे और पले बढ़े 42 वर्षीय जगदीश (पाल) भाटिया यूँ तो शिक्षा के नाम पर दिल्ली युनिवर्सिटी से वाणिज्य में स्नातक हैं तथा तकनीकी शिक्षा के नाम पर कंप्यूटर मल्टीमीडिया में डिप्लोमाधारी हैं किन्तु इन दिनों अपनी हिंदी टूल बार के लिए हिंदी अंतरजाल में खासे लोकप्रिय हैं । उनके कार्य की चारों ओर तारीफ़ हो रही है । उन्होंने हिंदी टूल बार रच कर आम हिंदी प्रिय लोगों के लिए कम से कम अंतरजाल के उपयोग को अति सरल बना दिया है । जहाँ तक कैरियर का सवाल है उन्होंने बीस वर्षों तक कुछ ट्रैवेल कंपनियों में वित्त विभाग में काम किया ।  पिछले चार सालों से निवेश सलाहाकार के रूप में कार्यरत हैं । कंप्यूटर तथा इंटेरनेट पर शौंकिया काम। मुख्य चिट्ठा आईना पिछले साल इंडीब्लॉगीस में श्रैष्ट हिंदी चिट्ठों के लिये नामांकित हुआ था तथा चौथे नंबर पर आया। वे निवेश संबंधी सलाह का  चिट्ठा - पूंजी बाजार चलाते हैं । प्रस्तुत है पिटारा हिंदी टूल बार को लेकर उनसे हुई एक बातचीत । - संपादक

प्रश्न1- हिंदी टूलबार बनाकर इंटरनेट पर हिंदी के विकास के लिए इस सद्प्रयास के मूल प्रेरणा कैसे हुई ? इससे पहले आपने इंटरनेट पर हिंदी के विकास के लिए जो उल्लेखनीय उद्यम किया है क्या उसके बारे में हम जान सकते हैं ?

उत्तर: मैंने हिंदी चिट्ठाकारी अप्रैल २००६ में ही शुरू की थी। बहुत कम चिट्ठाकार थे उस समय मगर सब में एक दूसरे को सहयोग देने का जबर्दस्त जज्बा था। मुझे जब इस तरह के टूलबार के बारे में पता चला कि हिंदी में भी ऐसा टूलबार बनाया जा सकता है तो मैंने इसे केवल अपने मित्रों तथा जानकार चिट्ठाकारों के प्रयोग के लिये बनाया था। शुरू में केवल नारद, परिचर्चा और चिट्ठचर्चा जैसे जालपृष्ठों का ही लिंक लगाया गया था।

 

प्रश्न2. क्या इससे पहले ऐसे टूलबार उपलब्ध थे, जो हिंदी भाषा की दृष्टि से कारगर थे, यदि नहीं तो आपने किन भाषाओं में तैयार लैग्वेज टूल्स से प्रभावित हुए ?

उत्तर: वैसे तो गूगल के टूलबार का हिंदी संस्करण भी उपलब्ध है मगर वह हिंदी भाषा की दृष्टि से कारगर है यह नहीं कहा जा सकता। हमारा टूलबार हिंदी के प्रयोग तथा हिंदी के जालपृष्ठों कां एक साथ संग्रह करता है। इसे बनाने के लिये किसी दूसरी भाषा से प्रभावित नहीं हुए बस यही चाहते थे कि हिंदी चिट्ठाकारों के प्रयोग के लिये कुछ बनाया जाये। फिर हमेशा मन में यही रहा कि इसमें इस तरह के गजेट्स जोड़े जायें जिससे अधिक अधिक लोग इसका प्रयोग करें। धीरे धीरे इसमें इतना कुछ जुड़ गया जैसे कि रेडियो, क्रिकेट स्कोर कार्ड और हिंदी लिखने के औजार। इस तरह का टूलबार हिंदी के लिये पहला है तथा किसी से प्रभावित हो कर या नकल करके नहीं बनाया गया। अभी भी जो भी चीज इंटेरनेट पर हिंदी प्रयोगकर्ता की दृष्टी से उपयोगी होगी मेरी कोशिश होगी कि उसे इसमें जोड़ा जाये।

 

प्रश्न3. इस टूलबार की शुरुवात कैसे हुए, कब हुई और कब यह सार्वजनिक उपयोग हेतु जारी हुआ ? इसका रिस्पांस कैसे मिल रहा है, आप कैसे अनुभव कर रहे हैं ? इसमें और किन-किन चीजों को जोड़ने जा रहे हैं जिसके बारे में आपको फीडबैक मिल रहे हों या वे आपकी योजना में भी सम्मिलित हों?इस टूल्स के निर्माण की तकनीकी पक्षों के बारे में कुछ बताना चाहेंगे

उत्तर: इसे मैंने मई २००६ में बनाया था। पहले यह केवल निजी प्रयोग के लिये तथा मित्रों को वितरण के लिये ही उपलब्ध कराया गया था। मार्च २००७ में हमने इसमें रेडियो, स्कोरकार्ड तथा समाचारों के फीड जोड़ दिये तो मुझे लगा कि इस का उपयोग और लोग भी कर सकते हैं इसके बाद इसे हमने विभिन्न जालपृष्ठों पर डाउनलोड करने के लिये उपलब्ध कराया। प्रयोगकर्ताओं से जबर्दस्त रिसपांस मिल रहा है और उन्ही से प्रेरणा पा कर हम इसकी उपयोगिता को बढ़ाते रहते हैं। हम इस टूलबार में और भी अधिक मनोंरंजन उपलब्ध करवाना चाहते हैं।

 

प्रश्न4. इस टूलबार की सबसे बड़ी विशेषता और प्रभाव के बारे में आपका व्यक्तिगत मत क्या है ? इस टूल्स की यदि कोई कमजोरी है तो वह क्या है ?

उत्तर: हिंदी का इंटेरनेट पर प्रयोग करने वाला हर पाठक तथा लेखक चाहे वो किसी भी आयू वर्ग का हो इसे पसंद करता है। जो पाठक हिंदी पढ़ना जानता है मगर इंटरनेट पर हिंदी में उपलब्ध सामग्री के बारे में नहीं जानता उसे अगर एक बार यह टूलबार मिल जाये तो फिर वह हमेशा के लिये हिंदी के जालपृष्ठों का पाठक बन जायेगा। इस प्रकार हिंदी के पाठक बढ़ाने और उन्हें बनाये रखने में यह टूलबार सहायक हो सकता है। इस टूल की कमजोरी मेरे हिसाब से है इसकी लंबाई। यह स्क्रीन पर अपने विस्तृत रूप में पूरा नहीं आता है। ऐसा इस लिये हुआ कि हम इसमें अघिक से अधिक काम की सामग्री जोड़ना चाहते हैं।

 

प्रश्न 5.हिंदी के सॉफ्टवेयर विकासकर्ताओं, डेव्हलपरों और इंजीनियरों के लिए अन्य भाषा खासकर अंगेज़ी भाषा की तुलना में प्रोत्साहन के अवसर हैं, फिर भी आपने इस दिशा में एक कारगर और ऐतिहासिक कार्य कर दिखाया है, इसे किस तरह लेते हैं ?

उत्तर: मैंने जब इसे बनाया तो यह सोचा भी नहीं था कि यह टूलबार इतना पापुलर हो जायेगा। आज औसतन हर पांच सेकंड में दुनिया में कोई कोई प्रयोगकर्ता इस टूलबार पर क्लिक करता है। इसके प्रयोगकर्ता प्रति माह दोगुने हो रहे हैं। अब जब इसका इतना उपयोग हो रहा है तो मुझे बहुत खुशी हो रही है।

 

प्रश्न 6. इंटरनेट पर हिंदी के विकास के लिए आप और किस महत्वाकांक्षी परियोजना पर इन दिनों कार्यरत हैं (आपका सपना क्या है)? और हिंदी इंटरनेटिंग की गति तेज करने के लिए क्या-क्या प्रयास किये जाने चाहिए, हर स्तर पर ?

उत्तर: इंटेरनेट पर हिंदी लिखना और पढ़ना बहुत आसान है इस बात का प्रचार हर मंच पर और मीडिया में लगातार होना चाहिये। अधिक से अधिक हिंदी साहित्य नेट पर उपलब्ध हो। साथ ही मेरा सपना है कि स्कूलों के स्तर पर कंप्यूटर पर हिंदी प्रयोग को बढ़ावा मिले।

 

प्रश्न 7. अंत मैं वह कौन-सी बात है जिसे आप शेयर करना चाहेंगे ?

उत्तर: अभी हमने मनोंरंजन नाम से एक बटन जोड़ा है जिसमें कई वीडियो लिंक उपयोगकर्ता को उपलब्ध होंगे। मनोरंजन वाले बटन में और भी बहुत कुछ निकट भविष्य में जोड़े जाने की संभावना है। हम टूलबार में जो कुछ भी नया जोड़ते हैं वह अपने आप उपडेट हो जाता है आपको बार बार टूलबार डाउनलोड करने की आवश्यक्ता नहीं पड़ती।

◙◙◙

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google

 
 WWW http://www.srijangatha.com