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रात भर न सोने वाला शहरःन्यूयार्क डॉ. सुधीर शर्मा
न्यूयार्क का मौसम आमतौर पर जुलाई माह में सामान्य रहता है। लगभग 20 से 25 डिग्री का तापमान इन दिनों रहता है जो गर्मी के मौसम में अमेरिका के लिए अत्यधिक माना जाता है लेकिन हम भारतीय के लिए यह सामान्य और अच्छा मौसम है। इस जुलाई का तापमान भी कुछ ऐसा ही था । जॉन एफ. केनेडी न्यूयार्क का या यह कहें अमेरिका का सबसे बड़ा अंतराष्ट्रीय विमानतल है। इसकी आधुनिकता और सुविधाएँ एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराती हैं। इस विमानतल के लांज के ऊपर से एयर ट्रेन गुजरती है जो न्यूयार्क शहर को जाती है। दो बोगियों वाली यह ट्रेन यात्रियों को लाने-लेजाने का काम करती है। हवा में बातें करती यह ट्रेन विमान को चिढ़ा रही हो ऐसा कुछ लगता है। बहुमंजिला इमारतों का यह विमानतल सुरक्षा व्यवस्था के मामले में भी चुस्त है । शायद वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की घटना के बाद यह सुरक्षा और बढ़ी है। मुख्य दरवाज़े से बड़े बरामदे में आते ही हमें लेने आए भारतीय विद्या भवन के कार्यकर्ता मिले। यहाँ से एक बस में सवार होकर हम चल पड़े न्यूयार्क के हृदय में । होटल पेनसेलवेनिया जो पेन्स रेल्वे स्टेशन के सामने है। बस ने विमानतल से धीरे-धीरे न्यूयार्क का भौतिक परिचय कराना प्रारंभ कर दिया । अतिआधुनिक ऊँची-ऊँची भवनों से आँखे चौधिया-सी गईँ । बेहतरीन सड़कों का मायाजाल ऊपर-नीचे होती सड़कों और अनुशासन के साथ किंतु तेज भागती गाड़ियों ने मन को मोह लिया। किसे देखें, किधर देखें ऐसी स्थिति हो गई।
अभी गाड़ी एक टनल से गुजर ही रही थी कि न्यूयार्क के हिंदी प्रेमी ने बताया कि हम एक समुद्री टनल से गुजर रहे हैं। और लगभाग तीन-चार किलोमीटर के इस टनल के ऊपर समुद्र है। यानी हम समुद्र के नीचे से गुजर रहे थे। यह न्यूयार्क शहर को दूसरे हिस्से से जोड़ता है और इससे दूरी बचती है। हमारी बस होटल पेनसेलवेनिया पहुँची । 20 मंजिला यह होटल न्यूयार्क के हृदय में स्थित है। यह मेनहट्टन कहलाता है। दुनिया के सबसे बड़े शहर का सबसे महँगा स्थल। मेनहट्टन के इस होटल में पूरी दुनिया मौजूद थी। रिसेप्शन के सामने ही अनेक लोग कमरों के आरक्षण के लिए कतारबद्ध थे। कुछ लोग सोफ़े और कुर्सियों पर विराजमान थे, बहुत सारे लोग खड़े हुए थे और कुछ आ-जा रहे थे। कुल मिलाकर भीड़-भाड़ थी। अमूमन भारतीय होटल में रिसेप्शन खाली रहता है और होटल वाले ही कमरे के लिए पहल करते हैं लेकिन यहाँ कमरों के लिए मारामारी है और तीन-चार घंटों की लाइन के बाद कमरा मिल पाता है। पूरी दूनिया के मौजूद होने का मतलब इस जगह अनेक देशों के पर्यटक या यात्रियों को कमरे लिए के लिए एकत्रित होना है। लग-अलग रंग, अलग-अलग बेषभूषा और आयु के लिए एक मानव-गुलदस्ता की भाँति यहाँ दुनिया का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
बात मेनहट्टन तक सीमित करें तो न्यूयार्क का हृदय रात-दिन जागते रहता है। चौबीस घंटों भीड़-भाड़ । दुनिया भर के लोग आते-जाते शापिंग, सिनेमा, आदि का आनंद लेते रहते हैं। सड़क नं. 20 से 42 के व्यस्तता देखते ही बनती है। सारी दुनिया के वैभव इन सड़कों तक फैला दिखाई देता है। बड़ी-बड़ी दुकानें, सिनेमा, और मल्टीकलर इलेक्ट्रानिक विज्ञापन बोर्डों के कारण इसकी आभा अलग ही दिखाई देती है। फिल्मों के स्क्रीन की तरह विज्ञापन के डिस्प्ले बोर्ड रात में रोशनी बिखरते चलते रहते हैं। मेनहट्टन का यह बाज़ार रात नौ बजे के बाद अपने पूरे शबाब में रहता है। कारण न्यूयार्क में सूरज रात आठ से साढ़े आठ बजे के बीच ही डूबता है। भीड़-भाड़ की इन सड़कों पर भी टैक्सियाँ तेज रफ़्तार के साथ दौड़ती रहती हैं। फुटपाथ पर यहाँ भी ठेला लगता है लेकिन निर्धारित जगह पर और पूरी साफ-सफाई के साथ। जहाँ अधिकतर नानवेज़ के कुछ फास्ट फूड और कुछ कपड़ों, मोमेटो, आदि के ठेले रहते हैं। कुछ कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन भी करते हैं और पर्यटकों को अपनी सेवाएं देते हैं इनमें कार्टून और पोट्रेट बनाने वाले, कुछ कैमरा मेन शामिल हैं। मुख्य मेला तो स्ट्रीट नं 42 के आसपास लगा दिखाई देता है जहाँ टाइम स्क्वायर बिल्डिंग है। यहीं कुछ बड़े मल्टीप्लेक्स, कुछ पब और दो-चार कामेडी शो के हॉल हैं। कुछ बड़ी कंपनियों के कार्यालय भी यहाँ हैं। न्यूयार्क का रात यहीं जागती-नाचती दिखाई देती है। दुनिया भर के पर्यटक यहाँ रात दो-तीन बजे तक घूमते हैं।
बताते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से न्यूयार्क को दुनिया के प्रमुखतम वित्तीय शहर की मान्यता मिल गई थी। विश्व भर के शेयर बाज़ारों की दिशा बदलने वाला वॉल स्ट्रीट यहीं पर है । यहाँ का न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज विश्व का सबसे बड़ा शेयर बाज़ार है। मीडिया के क्षेत्र में न्यूयार्क विश्व की बहुत बड़ी शक्ति है। मीडिया के अनेक कार्यालय मेनहट्टन में हैं। टाइम वार्नर, न्यूज कारपोरेशन और वायकाम का मुख्यालय यहीं है तो दुनिया की दस सबसे बड़ी विज्ञापन एजेंसियाँ में से छह का मुख्यालय यहाँ है। इसीलिए इन सड़कों पर दुनिया के सबसे आधुनिकतम और भव्य विज्ञापनों के दर्शन होते हैं। न्यूयार्क में दो सौ से ज्यादा अख़बार और साढ़े तीन सौ से ज्यादा पत्रिकाओं के कार्यालय हैं जिनमें न्यूयार्क टाइम्स और टाइम मैग्जीन भी शामिल हैं। यही नहीं विश्व के चार सबसे बड़े प्रसारण नेटवर्क जैसे एबीसी, सीबीएस फॉक्स, और एनबीसी के मुख्यालय भी न्यूयार्क में है।
न्यूयार्क एक अंतरराष्ट्रीय शहर है। यही कारण है कि सामाजिक संस्कृति के लक्षण यहाँ दिखाई देते हैं। यहाँ लगभग 170 भाषाएँ बोली जाती हैं। इस शहर की 36 प्रतिशत जनसंख्या विदेशों में जन्में लोगों की है। अर्थात् गैर अमेरिकी लोगों का शहर है न्यूयार्क । अलग ही विश्व संस्कृति को जन्म देता न्यूयार्क इन्हीं विशेषताओं के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय के लिए चुना गया। दुनिया भर के देशों के दूतावास यहाँ है।
विश्व के इस सबसे बड़े और व्यस्त शहर की जिम्मेदारी मेट्रोपोलिटन म्यूनिसिपैलिटी के हाथों है। मेयर इसके प्रमुख होते हैं। अमेरिका की सबसे अधिक आबादी वाला यह शहर चुस्त प्रशासनिक व्यवस्था के कारण अनुशासित और सुंदर है। सैकड़ों संग्रहालय, कला वीथिकाएँ, सभागार, विश्वविद्यालय और स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी के कारण न्यूयार्क पर्यटकों के लिए आधुनिक स्वर्ग है। यह कई अमेरिकी सांस्कृतिक परिघटनाओं का जन्मस्थल रहा है जिनमें साहित्य और दृश्य कलाओं में हार्लेम नवजागरण, चित्रकला में अमूर्त अभिव्यक्तिवाद और संगीत में हिप-होप शामिल है। दुनिया का आकर्षण और भव्य ब्रुकलिन ब्रिज भी न्यूयार्क में है।
अमेरिका के उत्तरपूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थिक न्यूयार्क शहर को पाँच बड़ो भागों में बाँटा जा सकता है - द ब्रोन्कस, ब्रुकलिन, मैनहटल, क्वीन्स और स्टेटन द्वीप । लगभग 830 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के इस नगर में लगभग 82 लाख लोग रहते हैं। अकेले यहाँ के मेट्रोपोलिटन एरिया में करीब अठारह लाख लोग रहते हैं और उसे विश्व की प्रमुख शहरी बस्तियों में गिना जाता है। न्यूयार्क कभी बिग एपल, गोधम सिटी, दी सिटी दैट नैवर स्लीप्स आदि नामों से पुकारा जाता है। लाइफ़ यहाँ फ़ास्ट लेन पर है। कभी न सोने वाला यह शहर पर्यटकों को रात भी जागने विवश करता है।
हम भी छह दिन न्यूयार्क में रहे तो इन मैनहटल की गालियों ने रात भर जागने मज़बूर कर दिया। विश्व हिंदी सम्मेलन का आखिरी कार्यक्रम रात के 8 बजे के डिनर से समाप्त होता था। होटल पेनसेलवेनिया जो इन्हीं व्यस्त गलियों के स्ट्रीट नं. में है से रात दस बजे निकलकर हम दो बजे तक घूमते थे। इन गलियों ने हिंदी के सिपाहियों को दुनिया दिखलाई । भारतीय भी मिले और विदेशी भी।
न्यूयार्क में और न जाने कितनी खूबियाँ है, ओपन बस में घूमने का शौक भी पूरा हुआ और गरदन उठाकर आसमान से बातें करती इमारतों को देखने का भी । रात भर न सोने वाले इस शहर को हिंदी प्रेमियों का सलाम।
संपादक,साहित्य वैभव रायपुर ◙◙◙
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