साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच                                                                             SRIJANGATHA

।।सृजनगाथा।।

 

  ई-पताः srijangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 लघुकथा

 

क्यों

 

निरूद्ध बाबू आपनी अनुशासन प्रियता के लिए प्रसिद्ध भी थे और बदनाम भी। आते-जाते रास्ते में यदि अपरिचित व्यक्ति भी किसी प्रकार का अनुशासन तोड़ता हुआ दिख जाता तो उसे भी फटकार लगा देते थे, जो कभी मीठी होती थी पर कभी हठ पकड़ने पर तीखी भी। कुछ लोग भौचक्के हो जाते, कुछ बुरा मान जाते और कुछ हँस कर माफ़ी माँग लेते । मज़ाक नहीं थी कि कोई चूँ करे, क्यों कि उनके टोकने में दम हुआ करता था।

 

जीवन एक नियम-संयम की व्यवस्था है, उससे जुड़े रहने की शिक्षा अपने आचरण से वे देना चाहते थे। वह अध्यापक थे और अपना दायित्व समझते थे कि उन्हें समाज को शिक्षित करना है। एक दिन, नित्य प्रातः भ्रमण करने वाले मित्र को उनके न आने पर चिन्ता हुई। वह उनके घर पहुँचे तो देखा वह मायूस से सूर्योदय के बाद भी, विस्तर पर पड़े हैं। उऩ्हें हैरानी हुई, मास्टर साहब ! क्या शरीर ठीक नहीं है।

वह बोले, नहीं ! मन ठीक नहीं है....।

 

क्यों .........?”

इस क्यों की ही तो तलाश है। मुझे लगता था कि मैं समाज को दिशा दे सकता हूँ अपने आचरण से, शिक्षा से। पर मैं अपने घर को ही शिक्षा नहीं दे पाया । मैं असफल अध्यापक ही नहीं, असफल व्यक्ति भी हूँ । मेरा अहंकार गल गया । मेरे ही घर से सारे संयम-नियम विदा ले चुके हैं मेरे जीवित रहते ही.........ऐसा क्यों हुआ ?” कहकर वे रो पड़े।

डॉ. विद्याबिंदु सिंह

 ◙◙◙

 

 समकालीन लघुकथाएँ

राम पटवा

डॉ. विद्याबिन्दु सिंह

भगवान देव चैतन्य

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google

 
 WWW http://www.srijangatha.com