साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच                                                                             SRIJANGATHA

।।सृजनगाथा।।

 

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वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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  कविता

धरती हमारी नाव है

 

धरती हमारी नाव है....

लंबी यात्राओं पर निकले हैं

इसमें-

दो वृक्ष

दो नदियाँ

दो पहाड़

और दो व्यक्ति

परस्पर संवाद में

कई-कई मोड़ पार कर आए....

किंतु अब इनकी आत्माएँ घिरी हैं

प्रतिवाद में

छिन्न हुए संवाद

 

जाने कैसी होगी

आगे की यात्रा

कहाँ होगी समाप्त ?

  डॉ. बलदेव वंशी

कार्यसंपन्न रीड़र

दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

◙◙◙

 

 इस अंक के कवि

डॉ. बलदेव वंशी

पवन करण

सुभाष नीरव

हीरामन सिंह ठाकुर

माह के कवि

डॉ. महेंद्र भटनागर

प्रवासी कवि

शकुंतला बहादुर - युएसए

अजय त्रिपाठी - इंग्लैंड

 

 

 

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