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।।सृजनगाथा।।

 

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वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

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इस अंक में पढ़िये

कविताएँ

डॉ. बलदेव वंशी, पवन करण, सुभाष नीरव, हीरामन सिंह ठाकुर

माह के कवि - डॉ. महेंद्र भटनागर

प्रवासी कवि - शकुंतला बहादुर - युएसए, अजय त्रिपाठी - इंग्लैंड

 

 

छंद

माह के छंदकार - संजय ग्रोवर

गीत/ग़ज़ल - स्व. विजय देव नारायण शाही, डॉ. तिलकराज गोस्वामी, अवध बिहारी श्रीवास्तव, शंकर सक्सेनासंजीव मयंक

 

 

भाषांतर

  रेत - हरजीत अटवाल -पंजाबी उपन्यास (भाग - 1)

रवि का गुस्सा मैं पिछले पाँच-छह साल से देखती आ रही थी। दो बार मेरे ऊपर हाथ भी उठा चुका था। मैं भी मुकाबला करने के लिए विवश हो जाती। पहलीबार जब उसने मुझ पर हाथ उठाया था तो बाद में बहुत पछताता रहा था। रातभर माफी मांगता रहा था। उस वक्त मैं सोच रही थी कि घर छोड़कर चली जाऊँ। डैडी के घर जाना मुझे अच्छा नहीं लगता था। वहाँ जाकर मैं उनकी मुसीबतें ही बढ़ाती। डैडी-मम्मी को मानसिक कष्ट झेलना पड़ता। (अनुवादः सुभाष नीरव)

 

 

संगीत रूपक

प्रवीणराय - डॉ. श्यामसुंदर दुबे

 

 

व्याकरण

एक शब्द - खोदना - डॉ.गंगा प्रसाद बरसैया

 

 

संस्कार

एक नये समीक्षक को सलाह - जार्ज बर्नार्ड शॉ 

 

संस्मरण

समुंदर के किनारे शतरंज - मोहन राणा

चैस के साथ मोहन राणाजाने में मोहरों के अलावा 14 गोटियाँ भी थी और एक बारीक नक्काशीदार बकसुआ भी था, उस खजाने को वह घर ले आया, शुरू-शुरू में किसान ने उसे अपनी गौशाला में प्रदर्शन के लिए रख दिया और जिले भर से लोग उस कतुहल को देखने के लिए आते थे। कुछ समय बाद उसने उसे स्ट्रोनअवे के रॉडरिक पेइरी नामक व्यापारी को तीस पाउँड में बेच दिया।

रायपुर में स्वामी विवेकानन्द - स्वामी आत्मानंद

 

शोध ग्रंथ

हिंदी लघुकथा का विकास (भाग - दो) - डॉ. अंजलि शर्मा

 

बचपन

तीन बाल कविताएँ - डॉ. तारादत्त निर्विरोध

बाल कविता - नानाजी का चश्मा - हरीश दुबे

 

शेष-विशेष

इन दिनों....

न करें किसी कौम को कठघरे में खड़ा - विश्वनाथ सचदेव

नगरनामा....

रात भर न सोने वाला शहरःन्यूयार्क - डॉ. सुधीर शर्मा

जिंदगी के रंग....

मेरे घर आई एक नन्हीं परी......! - किशोर दिवसे

मीडिया....

मीडिया, बाजार और प्रतिबद्धता - डॉ. उर्मिला शुक्ला

राजकाज....

इराक में ईरानी हस्तक्षेप का औचित्य - तनवीर जाफ़री

प्रसंगवश....

वृद्धाश्रमों में कैद होती झुर्रियाँ - डॉ. महेश परिमल

देश-विदेश की सांस्कृतिक डायरी....

जहाँ पे सवेरा हो, बसेरा वहीं है - लावण्या शाह

(अमेरिका से जानी मानी रचनाकार का नियमित स्तम्भ । अमेरिका में हिंदी संस्कृति के सामयिक घटनाक्रमों पर एक नज़र )

 

 

तकनीक 

रफ़्तार से पाँव पसारता हुआ रफ़्तार - जयप्रकाश मानस

रफ़्तार हिंदी का पहला ऐसा संपूर्ण सर्च इंजन है जिसमें अँग्रेज़ी के कीबोर्ड से हिंदी में टाइप किया जा सकता है । ट्रांसलिटरेशन, यानी कि एक भाषा के अक्षरों को दूसरी भाषा में कन्वर्ट करने वाला यह अद्वितीय सर्च इंजन है । हिंदी खोजने के लिए किसी तरह की अलग टायपिंग टूल की आवश्यकता नहीं पड़ने वाले इस खोज यंत्र के पीछे है शोध और अध्ययन से संबंद्ध संस्था इंडिकस नेटलैब्स और पीयूष बाजपेयी....

हिंदी टूलबार पिटारा यानी हिंदी का संपूर्ण संसार

(जगदीश भाटिया से हुई खास चर्चा के अंश)

 

हलचल

आदिवासी जीवन पर केंद्रित छायाचित्र प्रतियोगिता

रूसी-हिंदी-अँग्रेज़ी का समग्र शब्दकोष तैयार

भारत एल्यूमिनियम कंपनी द्वारा रचनाकारों का सम्मान

युवा लेखन हेतु 'पहिलाज राय मुसाफ़िर' राष्ट्रीय पुरस्कार

तनवीर जाफ़री हरि.साहित्य अकादमी के सदस्य मनोनीत

हिंदी उपन्यास 'मिठलबरा की आत्मकथा' अब उड़िया भाषा में

दुर्गा पूजा पर एक साथ 300 उपन्यास प्रकाशित

झूलता हुआ ग्यारह दिसम्बर पर चर्चा

यूक़े में गीतांजलि बहुभाषी कवि दरबार 2007 सम्पन्न

बर्मिंघम में रामायण पर सेमिनार और गायन

 

ब्लॉगिंग पर बालेन्दु दाधीच का

                   खास विमर्श

ललित निबंध

राम की जल-समाधि - महेश चन्द्र द्विवेदी

हाय रे मेरा पुरुष-अहम्, मेरी संकुचित स्वार्थी सोच एवं मेरा पाषाणवत हृदय कि अग्निपरीक्षा में उत्तीर्ण होने के पश्चात भी मैने धोबी द्वारा अपनी पत्नी के प्रति कही हुई कटूक्ति मात्र पर सीता को वन में छुड़वा दिया था। सीता द्वारा लज्जावश धरती माता की गोद में समाहित हो जाने के पश्चात भी मुझे तभी उनके त्याग, प्रेम एवं समर्पण की स्मृति हुई थी, जब मैं वृद्ध, अशक्त,पराश्रित होने लगा था।

एक दुराशा - बाल मुकुन्द गुप्त

 

कहानियाँ

नो समोसा पार्टी प्लीज़ - ब्रिटेन से डॉ क़ृष्ण कुमार की कहानी

विक्रम और नीलम शुक्रवार की शाम को ही आ गए थे । नीलम अपने नाइजीरियन ब्वाय फ्रेंड स्टीवेन के साथ आई थी । घर पहुँचते ही नीलम ने अपने माँ-बाप से स्टीवेन का परिचय करवाया। रंजना-बलदेव अपनी बेटी के काम करने के ढ़ंग से तपते तवे की तरह लाल हो गए । दोनों एक-दूसरे के चेहरे देखते रह गए । नीलम को कमरे का वातावरण समझने में गलती नहीं हुई ।

सगुन चिरैया - गोवर्धन यादव की हिंदी कहानी

मेज - इला प्रसाद (यु.एस.ए. से प्रवासी कहानी)

 तूफ़ान - खलील जिब्रान की बहुचर्चित कहानी

गिरगिट - अन्तोन चेखव की रशियन कहानी

राम पटवा,  डॉ. विद्याबिन्दु सिंह, भगवान देव की लघुकथाएँ

 

 

धारावाहिक उपन्यास

 

सीधे अंतरजाल पर प्रकाशित हिंदी का पहला उपन्यास

 

आधे चाँद की रात - एस. अहमद

जिन्नाह के ''होमलैण्ड'' की माँग को वे पसंद नहीं करते थे। वे सियासतदाँ तो नहीं हैं कि हर मसले का हल सियासत की नज़र से देखते, उनको लगता था कि मुसलमान तो पूरे मुल्क में है। किसी एक हि