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मनोरंजन जगत को मालामाल करती हिंदी हरिकृष्ण निगम
आज हिंदी की व्यापक लोकप्रियता और इसे संप्रेषण के माध्यम के रूप में मिली आम स्वीकृति किसी संवैधानिक प्रावाधान या सरकारी दबाव का परिणाम नहीं है। मनोरंजन और फिल्म की दुनिया ने इसे व्यापार और आर्थिक लाभ की भाषा के रूप में जिस तरह विस्मयजनक रूप से शनैः शनैः स्थापित किया। उसने आज इसके पारंपरिक विरोधियों व उनके दुराग्रहों का मुंह बंद कर दिया है। आज हम स्पष्ट देख रहे हैं कि आर्थिक सुधारों व उदारीकरण के दौर में निजी पहल का जो चमत्कार हमारे सामने आया है इससे हम मानें या न मानें हिंदी दुनिया भर के दूरदराज़ के एक बड़े भू-भाग में समझी जाने वाली भाषा स्वतः बन गई है।
यदि हम पीछे मुड़कर देखें तो पाएंगे कि
स्पीलबर्ग के 'जुरासिक पार्क'
ने हमारे देश में जितना धन अपने हिंदी
संस्करण से अर्जित किया वह इसके अँग्रेज़ी के मूल
चित्र से दुगुने से अधिक था। यही हाल स्टार या
बी.बी.सी. चैनल का है जो भारत में हिंदी कार्यक्रमों
या वे सीरियल जो हिंदी में 'वायस
ओवर' के द्वारा प्रसारित किए
जा रहे हैं उनका महत्व समझता है। भाषा-स्थानांतरण
दुनिया के उत्कृष्ट कार्यक्रमों को हिंदी के माध्यम से
रातों-रात करोड़ों नए दर्शक दे रहा है। यह स्वतंत्र
बाज़ार और प्रतिस्पर्धा का आज का स्वीकृत खेल है और अब
भाषा को भावनात्मक विरोध का विषय बनाकर कुछ निजी
राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित लोग हिंदी के प्रति
विषवमन सरलता से नहीं कर पाएंगे।
राजभाषा के रूप में हिंदी को संशय से
देखने वाला अँग्रेज़ी मीडिया का एक बड़ा वर्ग कितने ही
पूर्वाग्रहों से ग्रस्त हो या मातृभाषा के रूप में
हिंदी भाषी भी इसे संकोच या हीनता-भाव से बोले;
सच तो यह है कि उपभोक्ता संस्कृति में,
लाभ की भाषा,
बिकने की भाषा, बाज़ार व विपणन
की भाषा सबसे बड़ी होती है। हिन्दी की व्यावसायिक
सामर्थ्य बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भली-भाँति समझती है।
कुछ साल पहले जब विख्यात पॉप स्टार मुंबई आए उस समय
'मीडिया हाईप'
द्वारा अभूतपूर्व उत्साह उत्पन्न किया
गया था अँग्रेज़ी के अखबार व चैनल इसे उस वर्ष की सबसे
बड़ी सांस्कृतिक गतिविधि बनाना चाहते थे। यह भी
प्रचारित किया गया कि वे कुछ पंक्तियाँ हिंदी में भी
प्रस्तुत करेंगे। टाइम्स समूह के एक प्रमुख पत्र के
प्रथम पृष्ठ के तीन कॉलम में फैले इस समाचार का शीर्षक
था 'माइकल जैक्सन का एक रॉक-शो
हिंदी में।' उसके बाद कई दिन
तक जी.टी.वी. के समाचार में माइकल जैनसन को हिंदी में,
थोड़ी मुश्किल से,
यह बोलते दिखाया गया, 'मैं
आ रहा हूँ, यह मेरा वादा है।
जो माइकल जैक्सन के अंतर्राष्ट्रीय आयोजक पेप्सिको
हिंदी की ताकत को डालर में तौलने की क्षमता युक्त थे। एक बात अवश्य है कि एक ओर हिंदी भाषा बाज़ार और मुनाफ़े की कुंजी बन रही है वहीं 'हिंगलिश', 'इंडिक', 'बटलर', 'इंडिगी', 'भेल पुरी इंगलिश', 'बिरयानी इंगलिश', 'सींगलिश' या 'स्विच-स्वैप' या 'खिचड़ी इंगलिश' को हमारा मीडिया अँग्रेज़ी के बचे खुचे दंभ की ओर ही इंगित करता है। हिंदी की सामर्थ्य स्वीकार करने के बाद भी भाँडों या विदूषकों की इस कृत्रिम भाषा से हिंदी की शालीनता, सक्षमता और प्रभावोत्पादकता से खिलवाड़ जारी है। श्रव्य-दृश्य मीडिया में हिंदी तो है पर इसी अघोषित लिपि रोमन हो गई है। 'स्टार के हिंदी अवतार' पर कुछ देश के ही समाचार पत्रों ने मीडिया जगत के बेताज बादशाह रूपर्ट मर्डोक के न्यूजकार्प के हिंदी प्रेम का मखौल भी उड़ाया था।
आज हालीवुड के फिल्म निर्माता भी भारत में अपनी विपणन नीति बदल चुके हैं। वे जानते है। कि यदि उनकी फिल्में हिंदी में रूपांतरित की जाएगी तो यहाँ से वे अपनी मूल अँग्रेज़ी में 'निर्मित चित्रों' के प्रदर्शन से कहीं अधिक मुनाफ़ा कमा सकेंगे। पश्चिमी फिल्मों के 'ब्लाकबस्टर' कहलाने वाली हिंदी 'प्रिंटस' की हमारे देश में जितनी खपत होती है वह अँग्रेज़ी 'प्रिंटों' की संख्या से कहीं अधिक है। इसमें यदि उन्हीं फिल्मों की भोजपुरी, तमिल या तेलगु भाषा की प्रिंटस की संख्या जोड़ी दी जाए तो आज मूल अँग्रेज़ी भाषा की फिल्मों की लोकप्रियता का भंडा स्वतः फूट जाता है।
सोनी पिक्चर्स के विक्रमजीत राम के अनुसार विदेशी फिल्मों की नई मजबूरी यह है कि अब वे भी 'स्वदेशी तड़का' लगने से ही अधिक बिकती है । चाहे 'स्पाइडर मैन 3' हो, 'कैसिनो रायल' जैसी फिल्म हो अथवा 'पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन' या 'हैरी पॉटर एण्ड द आर्डर ऑफ फीनिक्स'- इन सभी फिल्मों के हिंदी संस्करण का प्रदर्शन अँग्रेज़ी फिल्मों के अनुपात में कहीं अधिक हुआ है। 'हिंदी में डबिंग' किए हुए अँग्रेज़ी फिल्मों के इन संस्करणों ने उन्हें देश में लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचाया है। उदाहरण के लिए अँग्रेज़ी फिल्म 'कैसिनो रॉयल' के देश के कुल 427 प्रिंटस में से मात्र 130 प्रिंट अँग्रेज़ी में और बाकी 297 प्रिंट हिंदी व भारतीय भाषाओं में थे। इस फिल्म ने बॉक्स आफिस पर 42 करोड़ रुपये कमाए थे। 'हाई हार्ड 3' नामक फिल्म के हिंदी में 96 प्रिंटस बने जबकि अँग्रेज़ी में मात्र 50 प्रिंटस जारी किए गए ।
'स्पाइडर 2' ने देश में 35 करोड़ रुपये अर्जित किए थे। इसके 304 प्रिंटस में मात्र 94 प्रिंटस अँग्रेज़ी में थे। 'स्पाइडर मैन 3' ने कुल 66 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया था। इसके हिंदी प्रिंट के साथ-साथ भोजपुरी में भी 7 प्रिंटस बनाए गए थे। जिसके द्वारा इतना धन कमाया गया था कि फिल्म उद्योग से जुड़ेल लोग चकित थे। सूत्रों के अनुसार निकट भविष्य में जैकी चान की ऐक्शन व मारधाड़ वाली फिल्म 'रश आवर 3' की 100 प्रिंटस हिंदी में और मात्र 50 प्रिंटस अँग्रेज़ी में देश भर में दिखाए जाएंगे। हालीवुड की आज की वैश्विक बाज़ार की परिभाषा में हिंदी जानने वालों का महत्व सहसा बढ़ गया है। भारत को आकर्षित करने का उनका अर्थ अब उनकी दृष्टि में हिंदी भाषियों को भी उतना ही महत्व देना हैं। हमारे अँग्रेज़ी भक्त बुद्धिजीवी हिन्दी क्षेत्र को सदैव 'काउबेल्ट', 'हिन्दी बैकपाएर्स', 'हिन्दी हिन्टरलैण्ड' या पिछड़ी, सुप्त, गोबरपट्टी कहते नहीं अघाते हैं पर आज बाज़ार की भाषा ने हिंदी को अँग्रेज़ी की अनुचरी नहीं सहचरी बना दिया है।
अभी कुछ दिन पहले मुंबई की जानी मानी विज्ञापन एजेंसी के सर्वेक्षण द्वारा कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। देश में प्रकाशित मुद्रित विज्ञापन आज 70 प्रतिशत से अधिक अँग्रेज़ी में होते हैं और हिंदी पत्र-पत्रिकाओं को मात्र 11.3 प्रतिशत विज्ञापन प्राप्त होते हैं। पर टी.वी. के विविध चैनलों में यह प्रतिशत उल्टा है। आज कुल मिलाकर टी.वी पर प्रसारित हिंदी विज्ञापनों का प्रतिशत 93.7 है। जबकि अँग्रेज़ी के विज्ञापन केवल 7 प्रतिशत हैं। आज टी.वी. देखने वालों की कुल अनुमानित संख्या जो लगभग 10 करोड़ मानी गई है उसमें हिंदी का ही वर्चस्व है। (नलेस) ◙◙◙
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