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आदिवासी जीवन पर केंद्रित छायाचित्र प्रतियोगिता भोपाल(मध्यप्रदेश)। आदिम जातियों की अस्मिता को विशेष तौर पर तवज्ज़ो देते हुए भारत के हृदय-प्रदेश मध्यप्रदेश से एक ग्लोबल एवं निःशुल्क छायाचित्र प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है । प्रतिभागियों से बहुरंगी आदिवासी जीवन के यादगार छायाचित्र 20 अक्टूबर 2007प्रतिभागियों को 21 वर्ष से कम नहीं होना चाहिए । छायाचित्र मौलक हो । वह 12 बाय 18 इंच आकार की हो व उचित माउण्ट किये गये हो । एक प्रतिभागी अधिकतम 3 प्रविष्टि भेज सकता है । प्रविष्टि के साथ छायाचित्र के पीछे बड़े अक्षरों में छायाकार का नाम, पता, दूरभाष, शीर्षक, एवं प्रविष्टि के संबंध में पूर्ण तकनीकी जानकारी कैमरा, लैंस, फिल्म डिजीटल/आप्टिकल का उल्लेख हो । छायाकार से बायोडेटा एवं जन्मतिथि संबंधी प्रमाण-पत्र व छायाचित्र का निगेटिव या सीड़ी भी सलंग्न करना अपेक्षित है । ऐसे छायाचित्र व्यक्तिगत रूप से या रजिस्टर्ड डाक से माँगा गया है । प्रतियोगिता-प्रदर्शिनी के नियम-शर्तों आदि की जानकारी जिन्हें चाहिए वे 11 बाय 8 इंच आकार के स्वयं का पता लिखा वापसी लिफाफा(पर्याप्त डाक टिकट के साथ)भेज सकते हैं ।
प्रविष्टि भेजने का पता है – प्रबंध संचालक (आदिम जाति कल्याण विभाग), राजीव गांधी, भवन, 35, श्यामला हिल्स, भोपाल, मध्यप्रदेश, 462002, फोन – 91-755-2661492, 2661152, ई-मेल- vanya_prakashan@yahoomail.com ◙◙◙
रूसी-हिंदी-अँग्रेज़ी का समग्र शब्दकोष तैयार हैदराबाद(आंध्रप्रदेश)। हैदराबाद स्थित विदेशी भाषा विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति अभय मौर्य ने हिंदी, अँग्रेज़ी और रूसी भाषा का पहला समग्र शब्दकोष तैयार किया है । क़रीब सत्तर हजार शब्दों वाले इस शब्दकोष का 10 सितम्बर 2006 को रूसी विज्ञान और संस्कृति केंद्र में विमोचन किया गया । श्री मौर्य जाने-माने रूसी भाषा विशेषज्ञ हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में वर्षों तक यह भाषा पढ़ाते रहे हैं । वे कई किताबों के रचयिता भी हैं । हरियाणा के निवासी श्री मौर्य द्वारा संपादित इस शब्दकोष में रूसी शब्दों का हिंदी और अँग्रेज़ी में अर्थ देने के साथ-साथ उसका हिंदी में उच्चारण दिया गया है । इसके अलावा इसमें रूसी व्याकरण और मुहावरे भी दिए गए हैं । मौर्य जी के अनुसार इस शब्दकोष के निर्माण में तीन साल का समय लगा । ◙◙◙
भारत एल्यूमिनियम कंपनी द्वारा रचनाकारों का सम्मान कोरबा(छग)। हिंदी दिवस के अवसर पर वेदांत समूह की अंतरराष्ट्रीय स्तर कंपनी बालको (भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड़) द्वारा कोरबा के विभिन्न साहित्यिक संगठनों के संयुक्त तत्वाधान में मुख्य अतिथि के आसंदी से भाषाविद् और नागरी प्रचारिणी सभा, दिल्ली के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. व्यास ने कहा कि हिंदी समन्वय की भाषा है । वह आत्मसंस्कारित करती है । वह दो दिलों को जोड़ती है । उसी के सहारे देश को आजा़दी मिली है जो भविष्य में विश्व के कई देशों की गुलामी के विरुद्ध शंखनाद की भूमिका रचती है ।
विशिष्ट अतिथि और अनुवाद की त्रैमासिक पत्रिका सद्भावना दर्पण के संपादक गिरीश पंकज ने कहा कि हिंदी में अतिशुद्धतावादी विचारों के चलते यदि अंग्रेज़ी और इतर भाषाओं के शब्दों को समाविष्ट नहीं किया गया तो वह अधिक व्यापी नहीं बन पायेगी । हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए हिंदी के रचनाकारों का भी सामाजिक मान्यता अत्यावश्यक है और इस दिशा में बालको का योगदान निरंतर रेखांकित हो रहा है । साहित्य वैभव के संपादक डॉ. सुधीर शर्मा अपने सारगर्भित वक्तव्य में विशिष्ट अतिथि के हैसियत से कहा कि हिंदी के विकास में हिंदी सीनेमा का भी विशेष हाथ रहा है।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर आमंत्रित सृजनगाथा के संपादक जयप्रकाश मानस ने कंप्यूटर और इंटरनेट पर हिंदी की उपलब्धि के बारे में बताते हुए कहा कि अगली सदी में कंप्यूटर और इंटरनेट पर हिंदी का राज होगा । विदेशी भाषा अँग्रेज़ी के सहारे ही कंप्यूटर और इंटरनेट पर हिंदी के ढ़ेर सारे स़ाफ्टवेयर और एप्लीकेशन विकसित हुए हैं अतः यह कहना कि अंग्रेज़ी ने हिंदी का नुकसान किया है, ग़लत होगा । कोई भी भाषा किसी भाषा को ध्वस्त नहीं करती । यह तो हम हैं जो किसी भाषा के ध्वस्तीकरण के बारे में नहीं सोचते । भारत का भविष्य ऐसा होगा जिसमें बच्चा कंप्यूटर के साथ पढ़ने जायेगा । अतः आवश्यक है कि कंप्यूटर की तकनीक को जीवन के सभी क्षेत्रों में उसकी उपयोगिता के अनुरूप अपनाया जाय ।
इस अवसर पर कश्यप द्वारा लिखित कृति.... का विमोचन बालको के मुख्य अधिकारी श्री एस. सिंह ने किया । उक्त अवसर पर हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित विभिन्न शालेय प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया । कार्यक्रम के अंत में बालको प्रबंधन द्वारा सभी अतिथियों का शाल, श्रीफल, लेखनी और नगद राशि प्रदान कर सम्मान किया गया । इस खास मौके पर बालको के जनसंपर्क प्रमुख .. आदि बड़ी संख्या में अधिकारी और हिंदी सेवी उपस्थित थे । ◙◙◙
युवा कविता लेखन हेतु 'पहिलाज राय मुसाफ़िर' राष्ट्रीय पुरस्कार रायपुर(छग)। राज्य के ख्यातनाम् सिंधी और हिंदी के रचनाकार पहलाज राय मुसाफ़िर द्वारा उनके ही नाम से अखिल भारतीय युवा लेखन पुरस्कार की शुरूआत की गई है । पहला सम्मान चयनित युवा कवि को प्रदान किया जायेगा । प्रतिवर्ष चयनित रचनाकार को 5000/- रुपये नगद, प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं श्रीफल 1जून को प्रदान किया जायेगा ।
इस वर्ष यह सम्मान कविता के लिए प्रदान किया जायेगा । प्रविष्टि की अंतिम तिथि 30 मार्च2008 रखी गयी है । इस सम्मान में प्रविष्टि हेतु रचनाकार को अपनी प्रकाशित काव्य कृति या अप्रकाशित पांडुलिपि की 3 प्रतियाँ पुरस्कार चयन समिति के संयोजक, जयप्रकाश मानस, एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़, 492001 (मोबाईल - 94241-82664)के पते पर भेजनी होगी । ई-मेल - rathjayprakash@gmail.com पर विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है । काव्य कृति 2005 से 2007 के मध्य प्रकाशित हो । इच्छूक रचनाकार को प्रविष्टि के साथ अपना बायोडेटा भी भेजना होगा ।
चयन हेतु एक चयन समिति का गठन भी किया गया है, जिसमें श्री पहिलाज राय मुसाफ़िर के अलावा, भाषाविद् चित्तरंजन कर, जयप्रकाश मानस, डॉ. माया मसंद, श्रीमती शमीना खान सदस्य मनोनीत किये गये हैं । चयन समिति ने अपनी विज्ञप्ति में बताया है कि यह राष्ट्रीय सम्मान प्रत्येक वर्ष अलग-अलग विधा के रचनाकारों को प्रदान किया जायेगा। वर्ष 2007-08 के लिए कविता, 08-09 के लिए कहानी, 09-10 के लिए निबंध, 10-11 के लिए उपन्यास एवं 11-12 के लिए यह सम्मान नाटक/एकांकी के लिए दिया जायेगा । इस तरह से जीवित साहित्यकार की ओर से दिया जाने वाला यह द्वितीय राष्ट्रीय पुरस्कार है, इससे पहले ऋतुराज सम्मान दिल्ली के कवि ऋतुराज की ओर से प्रदान किया जाता है । ◙◙◙
हिंदी उपन्यास 'मिठलबरा की आत्मकथा' अब उड़िया भाषा में कालाहांड़ी(उड़ीसा)। हिंदी के सुपरिचित व्यंग्यकार गिरीश पंकज का हिंदी व्यंग्य उपन्यास ‘मिठलबरा की आत्मकथा’ अब उड़िया में प्रकाशित हो रहा है । उड़िया अनुवाद किया है छत्तीसगढ़ के युवा साहित्यकार और पेशे से शिक्षक कृष्णकुमार ‘अजनबी’ ने । उड़िया पाठक इस चर्चित उपन्यास को ‘बिराड़ी वैष्णबंक आत्म कहाणी’ नाम से पढ़ सकेंगे । यह उपन्यास आज की पत्रकारिता में व्याप्त विसंगतियों पर गहरा कटाक्ष है । इसके अनुवादक अजनबी को यह उपन्यास इसलिए पसंद आया क्योंकि इसकी व्यंग्यात्मक और रंजक भाषा ने केवल पाठकों को बाँधकर रखती है अपितु वह पत्रकारिता के सत्य का रहस्योद्घाटन भी करती है । ◙◙◙
तनवीर जाफ़री हरियाणा साहित्य अकादमी के सदस्य पुन: मनोनीत अम्बाला(हरियाणा)।19 सितम्बर। प्रख्यात लेखक एवं स्तम्भकार तनवीर जाफ़री को हरियाणा साहित्य अकादमी की शासी परिषद का पुन: सदस्य मनोनीत किया गया है। हरियाणा सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार नई शासी परिषद का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। तनवीर जाफ़री को अकादमी की शासी परिषद के पिछले कार्यकाल में भी दो वर्ष तक अकादमी की सेवा करने का अवसर मिला था।अम्बाला शहर के तनवीर जाफ़री एक प्रख्यात लेखक व स्तम्भकार हैं। जाफ़री के स्तम्भ नियमित रूप से देश के अनेकों प्रमुख समाचार पत्रों के अतिरिक्त कई अमेरिकी यूरोपीय व एशियाई देशों के समाचार पत्रों पत्रिकाओं व न्यूज़ पोर्टल्स में प्रकाशित होते हैं। राष्ट्रीय व अर्न्तराष्ट्रीय राजनीति, साम्प्रदायिकता एवं आतंकवाद का विरोध, धर्म निरपेक्षता, विश्व शांति तथा सामाजिक व साम्प्रदायिक सौहार्द्र आदि जाफ़री की लेखनी के प्रमुख विषय होते हैं। जाफ़री के अतिरिक्त अम्बाला छावनी के वरिष्ठ साहित्यकार डा. लीलाधर वियोगी (पूर्व विभागाध्यक्ष एस डी कॉलेज, अम्बाला छावनी) को भी इस बार अकादमी की शासी परिषद में शामिल किया गया है। दस सदस्यीय शासी परिषद में मनोनीत अन्य सदस्य हैं- सर्वश्री उदय भानु हंस (सूर पुरस्कार विजेता, हिसार), डा. श्याम सखा श्याम (रोहतक), डा. लाल चन्द गुप्त (पूर्व विभागाध्यक्ष कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), माधव कौशिक (चण्डीगढ़), डा. इन्दु बाली (चण्डीगढ़), रमेन्द्र जाखू, आई ए एस (चण्डीगढ़), राजबीर देसवाल, आई पी एस (पंचकुला) तथा हुकुम सिंह राणा (फरीदाबाद)। अपने स्तम्भकार को इस अवसर पर सृजनगाथा की ओर से भी बधाई । ◙◙◙
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