साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच                                                                             SRIJANGATHA

।।सृजनगाथा।।

 

  ई-पताः srijangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  छंद

संजय ग्रोवर की पाँच ग़ज़लें

पाँच

'मैं हँ' कि 'मैं हँ', 'मैं हँ', 'मैं हँ आजका कबीर'

पहले तो सुनके रो पड़े फ़िर हंस दिए कबीर

 

 कांधे को छूके जब कहा 'ुबरा मेरे फ़कीर'

मैं उसके घरके सामने उस दिन हुआ अमीर

 

बदलाव, बग़ावत या तरक्क़ी की ये तस्वीर

नदियां सुनीं थीं दूध की, यां उठ रहा खमीर

 

असदुल्ला खां ने एक वज़ीफा क्या ले लिया

मौकापरस्तों को तो जैसे मिल गयी नज़ी

   संजय ग्रोवर

'संवादघर'

एल-76ए, दिलशाद गार्डन,

दिल्ली-95

 ◙◙◙

छंदकार

माह के छंदकार

संजय ग्रोवर की पाँच ग़ज़लें

(एक, दो, तीन, चार, पाँच)

गीत

स्व. विजय देव नारायण शाही

डॉ. तिलकराज गोस्वामी

अवध बिहारी श्रीवास्तव

शंकर सक्सेना

ग़ज़ल

सजीवन मयंक

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google

 
 WWW http://www.srijangatha.com