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आदमक़द भूख
सन्नाटा बोलता हुआ बस वन की गोपनता खोलता हुआ
अपलक तरुवर तापस चिर उदास से, स्तंभित, आंतकित वन विनाश से घोटुल की रात आग दहकती नही, सल्फी, पीकर पुरवा बहकती नहीं गिद्धों का झुण्ड, पंख तौलता हुआ
चटियल चट्टानें, पगडंडी निर्जन गत यौवन सरिता का रेत भरा तन रसवंती महुआ का पर्णहीन रुख जंगल सब निगल रही आदमक़द भूख सँवलाए बदन को टटोलता हुआ
सुअंश, अमृता विहार कमला, कालेज़ रोड़, खंडेवाल कॉलोनी राजगांदगाँव, छत्तीसगढ़ ◙◙◙ |
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