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सिंहासन
राजा के घर बेटा जन्मा राजा हुए मगन राज-पाट घर में ही रह जाने के हुए जतन
राजा ने राजा बनने के ‘गुर’ को खूब सहेजा इसीलिए अपने बेटे को जंगल पढ़ने भेजा राजनीति लोमड़ी पढ़ाती चीता अनुशासन
मकड़ी से सीखा शिकार करने का, जाला बुनने बंदर ने बतलाया फलवाली डाली को चुनना भालू ने ‘दीक्षा’ दी, कैसे मरते हैं दुश्मन
निरपराध लोगों को जब धारा में गया लपेटा परजा समझ गई, पढ़कर आया राजा का बेटा भूखे बाघों के क़ब्जे में रहना सिंहासन
एच-2/37, कृष्णापुरम कानपुर – 7, उत्तरप्रदेश ◙◙◙ |
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