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फिर परिंदे लौटकर जाने लगे
नये पत्ते डाल पर आने लगे । फिर परिंदे लौटकर जाने लगे ।।
जो अँधेरे की तरह डसते रहे अब उजाले की क़सम खाने लगे ।
चंद मुर्दे बैठकर श्मशान में ज़िंदगी का अर्थ समझाने लगे ।
उनके ऐनक टूटकर नीचे गिरी दूर तक के लोग पहिचाने लगे ।
जब सियासत का नया नक़्शा बना थे जो अंधे लोग चिल्लाने लगे ।
आईनों की साफगोई देखकर सामने जाने से कतराने लगे ।
जब कोई सच्चाई निर्वसन होने लगी लोग उसको वस्त्र पहनाने लगे ।
251- शनिचरा वार्ड - 1, नरसिंह गली होशंगाबाद, मध्यप्रदेश ◙◙◙ |
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