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चिट्ठी का भूगोल
मिस्टर आलू
गोल मटोल
पढ़ने बैठे
चिट्ठी खोल ।
देखे
टेढ़े-मेढ़े अक्षर
नाक सिकोड़ा,
पीछे हँसकर ।
बोले, आना
इधऱ विटोल
देखो नक़्शा
यह अनमोल ।
लगता है फिर
पापाजी ने
मम्मी जी को,
लिख भेजा है
चिट्ठी में
सारा भूगोल ।
डॉ. तारादत्त निर्विरोध
254, पद्मावती कॉलोनी, ए
अज़मेर रोड़,
जयपुर
राजस्थान
–
302019
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बाल
कविताएँ
डॉ. तारादत्त
निर्विरोध की
कविता
फूलों की
पाठशाला
चिट्ठी का भूगोल
भालू बोला
हरीश दुबे -
नानाजी का चश्मा
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संपादकः
जयप्रकाश मानस
संपादक मंडलः
डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा,
डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः
प्रशांत रथ |