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तकनीक |
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कान्ट सी हिन्दी? लुकिंग एट टोटल गार्बेज? रविशंकर श्रीवास्तव
आजकल बहुत से चिट्ठों में यह दिखाई नहीं देता (मेरे चिट्ठों में से भी अब यह ग़ायब हो चुका है), परंतु अभी भी लोगों को जिनके पास पुराने विंडोज़ 98 तरह के या नए लिनक्स तंत्र जिनमें इंडिक-हिन्दी समर्थन पहले से संस्थापित नहीं होता है उसमें हमारे ब्लॉग के यूनिकोड हिन्दी दिखाई ही नहीं देते. और, यकीन मानिए, ऐसे प्रयोगकर्ताओं की संख्या हमारे ब्लॉग पाठकों की वर्तमान संख्या से लाखों गुना – जी हाँ, लाखों गुना ज्यादा है!
अब आपकी इस समस्या का समाधान पीयूष भट्ट लेकर आए हैं। पीयूष ने पहले ही भोमियो नाम का एक भारतीय भाषाई ऑनलाइन ट्रांसलिट्रेशन औजार बनाया है. जिसके जरिए आप किसी भी हिन्दी चिट्ठे को रोमन लिपि में पढ़ सकते हैं और काट-चिपका कर उसका अन्य इस्तेमाल - जैसे कि मैंने रचनाकार के चुटकुलों के संग्रह व अपने व्यंग्य रचनाओं का किया है - कर सकते हैं। अब उसमें उन्होंने अतिरिक्त ख़ूबियाँ जोड़ी हैं और उसमें आपके लिए अब प्रॉक्सी सुविधा का समावेश भी किया गया है। उसके जरिए आप अपने हिन्दी चिट्ठे को अंगरेज़ी लिपि में पढ़ने की कड़ी दे सकते हैं. जैसे कि यह कड़ी – इस कड़ी को क्लिक कर आप मेरे इस चिट्ठे को अंग्रेज़ी लिपि में पढ़ सकते हैं।
आप स्वयं अपने चिट्ठों के अंगरेज़ी समेत भारत की अन्य भाषाओं में पढ़े जाने के लिए कड़ियाँ बना सकते हैं और जैसा कि मैंने अपने इस चिट्ठे के बाजूपट्टी में ऊपरी दाँए किनारे पर अंग्रेज़ी में कड़ी दी है। अब मेरे चिट्ठों को वे सभी पाठक जिनके पास यूनिकोड हिन्दी दिखाने का समर्थन नहीं है आराम से और आसानी से रोमन लिपि में पढ़ सकते हैं. कड़ियां कैसे बनाएँ इसका विवरण यहाँ दिया गया है।
हाँ, इसमें वर्तमान में अभी एक खामी है कि यह यूनिकोड अक्षरों युक्त यूआरएल को समर्थित नहीं करता है (वर्डप्रेस के बहुत से चिट्ठों में यूनिकोड यूआरएल होते हैं), परंतु उम्मीद है कि इस खामी को शीघ्र ही दूर कर लिया जाएगा।
और, जी हाँ! आपके मन में सही विचार उठ रहे हैं! सृजन गाथा के पन्नों को भी रोमन लिपि में यहाँ पढ़ा जा सकता है.
100, सुकृति, राजीव नगर (कस्तूरबा) रतलाम, म.प्र - 457001
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