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वर्ष- 2, अंक - 14, जुलाई 2007

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   वातायन

 

 

अपने समय का सच बयान करती किताब


डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

 

 

वाम राजनीति के गुरु, प्रख्यात भाषावैज्ञानिक और मुखर राजनीतिक मूर्तिभंजक नोम चोम्स्की की 25 अप्रेल 2007 को प्रकाशित ताज़ा किताब ‘फ़ेल्ड स्टेट्स : द अब्यूज़ ऑफ़ पॉवर एण्ड द असाल्ट ओन डेमोक्रेसी’ सबसे पहले तो ‘फ़ैल्ड स्टेट’ (असफ़ल राज्य) की अवधारणा को ही स्पष्ट करती है। चोमस्की असफ़ल राज्य के तीन लक्षण बताते हैं : एक- वह संयुक्त राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा हो, दो- वह प्रजातंत्र के मामले में दिवालिया हो, और तीन- वह स्वयं को  अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों से ऊपर समझता हो। कहने की ज़रूरत नहीं, चोमस्की मानते हैं कि अमरीका इन तीनों शर्तों पर खरा उतरता है। अपने मत के समर्थन में वे अगणित साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। चोम्स्की इसे एक विडम्बना मानते हैं कि अधिसंख्य अमरीकी खुद को ‘सबसे ऊपर’ मानते हैं और आत्मालोचन से कतराते हैं। यहीं यह ज़िक्र कर देना भी प्रासंगिक होगा कि कुछ लोग असफ़ल राज्य के समानान्तर धूर्त्त राज्य (रोग स्टेट) की भी कल्पना करते हैं। धूर्त्त राज्य यानि एक ऐसा राज्य जहां के नागरिक सतत अव्यवस्था और भय में जीते हैं और जहां की नीतियां अन्तर्राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक होती हैं।

 

7 दिसम्बर 1928 को जन्मे अवराम नोम चोम्स्की की ख्याति की शुरुआत भाषा विज्ञान के क्षेत्र में उनके अवदान से मानी जाती है। ‘जनरेटिव ग्रामर’ की उनकी अवधारणा को बीसवीं सदी के भाषा विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।1960 के दशक में वियतनाम युद्ध की अपनी समीक्षा के कारण वे राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में जाने जाने लगे। अब तो वे अमरीकी राजनीति और विदेश नीति के प्रखरतम आलोचक के रूप में पूरी दुनिया में पहचाने जाते हैं। वर्तमान में चोम्स्की मैसाचुएटस इन्स्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी (एम आई टी) में भाषा विज्ञान के प्रोफ़ेसर एमेरिटस के रूप में कार्यरत हैं।

 

अमरीका पर गहरा कटाक्ष करते हुए चोमस्की कहते हैं कि अमरीकी सरकार का केवल एक छोटा-सा अंश – अमरीकी सेना, और उसका भी एक हिस्सा – अमरीकी वायुसेना ही युद्धरत रहते हैं। शेष अमरीकी सरकार तो सदा ही व्यवसाय रत रहती है। अपने देश के आतंकवाद विरोध को वे यह कह कर खारिज करते हैं कि अमरीका आतंकवादियों को पकड पाने में तो असफ़ल रहा ही है, अपने प्रयासों से सैंकडों-हज़ारों नए आतंकवादी और पैदा कर रहा है। अनेक अध्ययनों का हवाला देते हुए वे बताते हैं कि इराक में 85% लडाकों को अमरीकी हस्तक्षेप ने एकजुट कर डाला। चोम्स्की बिन लादेन मामलों के एक सी आई ए विश्लेषक के हवाले से यह भी कहते हैं कि मध्यपूर्व की समस्याओं का हल केवल तभी मुमकिन है जब अमरीका तानाशाहों और सस्ते तेल के लालच से खुद को अलग करे, मुस्लिम धरती से अपनी सेनाएं हटाए और लूटमार वादी पूंजीवाद को रोके।

 

अपनी इस किताब में चोम्स्की मानवता के खिलाफ़ अमरीका के अपराधों की लम्बी सूची पेश करते हैं और बताते हैं कि कैसे उसने चिली, ग्वाटेमाला, हाइती आदि में सत्ता बदलने में अपनी ताकत और प्रभाव का प्रयोग किया। इन देशों में प्रजातंत्र के खिलाफ़ तानाशाहों का समर्थन किया गया ताकि निजी अमरीकी निवेश को उनका,यानि तानाशाहों का, संरक्षण मिल सके। निश्चय ही इस तरह के कामों से इन देशों की जनता को भारी नुकसान उठाना पडा। चोम्स्की बुश की तुलना हिटलर से करते हैं और बताते हैं कि दोनों में एक प्रजातांत्रिक मसीहाई का भाव मिलता है और दोनों ही यह मान कर चलते हं कि एक झूठ को सौ बार दुहरा कर जनता को मूर्ख बनाया जा सकता है।

 

चोम्स्की के अनुसार अमरीकी सरकार अनैतिक सैन्य आक्रमण (जिसका ताज़ा उदाहरण वे इराक़ युद्ध को बताते हैं) में मदमस्त रहती है, ग्लोबल वार्मिंग से लगाकर सामाजिक व्यय और विदेश नीति तक हर मुद्दे पर जनमत की अवहेलना करती है, अमीरों का कर भार कम करने के लिए घरेलू सुरक्षा के बज़ट में कटौती कर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खुद खतरे पैदा करती है, दुनिया के दूसरे देशों में नफ़रत और असुरक्षा को प्रोत्साहित करती है। इन सबके कारण जवाबी आतंकवादी कार्यवाही और परमाणु संघर्ष की आशंकाएं बढती हैं। चोम्स्की दुनिया के अन्य देशों के भीतरी मामलों में दखल देने की अमरीकी नीति को उसके व्यापारिक हितों से प्रेरित  साम्राज्यवादी शक्ति प्रदर्शन की अनुपम मिसाल बताते हैं।

 

अपनी दृढ नैतिक संवेदनशील पक्षधरता, भरपूर तथ्यों, गहन अध्ययन, सूक्ष्म विश्लेषण, वज़नदार तर्कों और तेज़ाबी व्यंग्य बाणों के कारण यह किताब अपने समय और उस पर अमरीकी प्रभाव को जानने-समझने के लिए एक ज़रूरी पाठ के रूप में सामने आई है। किताब हमें आशंकित और अवसाद ग्रस्त तो करती है लेकिन अपने चतुर्दिक को और अच्छी तरह समझने में सहायक भी बनती है। यह हमें उन खतरों के प्रति आगाह भी करती है जो हम पर मण्डरा रहे हैं।

  

  डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

ई-2/211, चित्रकूट,

जयपुर – 302021

 

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