हवेली का साहित्य
कोचर एवं अंसार
हर नगर की अपनी अस्मिता, अपना गौरव और अपनी पहचान होती है। जिसके बल पर ही वह अपने भौगौलिक अस्तित्व के जरिये अपने होने का सघन एहसास देता है।
नगर बीकानेर अब तक
पापड भुजिया,
रसगुल्ला,
ऊन,
सिरेमिक्स जैसे व्यवसायों के जरिये ही अन्तरराष्ट्रीय
मानचित्र पर अपनी पहचान बनाए था लेकिन एड्वोकेट एवं
साहित्यानुरागी उपाध्यानचन्द्र
कोचर एवं जया उल हसन कादरी के संयुक्त प्रयास से हजार
हवेलियों का शहर बीकानेर
पुस्तक ने नगर को हवेलियों के शहर की श्रेणी में भी ला
खडा किया है। हालांकि
राजस्थान में हवेलियो का शहर के नाम से नवलगढ प्रसिद्ध
है,
पर बीकानेर की स्थापत्य
कला के ये बेनजीर,
बेमिसाल एवं नायाब नमूने किसी भी सूरत,
अपनी मूरत में
अन्य के
मुकाबले किसी भी स्तर पर कमजोर नही है।
