मीडियाकर्मियों का सम्मान
सृजनगाथा की पहली वर्षगांठ पर
रायपुर । छत्तीसगढ़ की पहली वेब पत्रिका “सृजनगाथा” की पहली वर्षगांठ पर प्रेस क्लब में मिनीमाता फाउंडेशन के सहयोग से राज्य के छह मीडियाकर्मियों को उल्लेखनीय भूमिका के लिए 'सृजनगाथा सम्मान' से नवाजा गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार बसंत कुमार तिवारी ने कहा कि हैंड कंपोजिंग प्रेस से इंटरनेट पत्रकारिता का सफल विभिन अनुभवों को जन्म देता है।
प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथियों ने वेब-पत्रिका, ‘सृजनगाथा’ के 13 वें अंक का लोकार्पण किया। पत्रिका के संपादक जयप्रकाश मानस ने छत्तीसगढ़ में इंटरनेट पत्रिका के एक वर्ष का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए बताया कि जिन संघर्षों के साथ छत्तीसगढ़ मित्र की शुरूआत हुई थी, आज भी इस आधुनिक युग में पहली वेब पत्रिका के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। “वेब मीडिया का भविष्य” विषय पर प्रस्ताविक व्याख्यान देते हुए पत्रकार संजय द्विवेदी ने कहा कि अब लेखक एवं पत्रकार को कलम के साथ-साथ ‘की- बोर्ड’ से जुड़ना पड़ेगा । तकनीक जाति, रंगभेद, धर्मभेद को नहीं मानतीं, वह पूरी तरह सेक्युलर है। उसकी गुणवत्ता एवं संसाधनों का सहारा लेकर कोई भी अपनी वैश्विक पहचान बना सकता है। इंटरनेट पत्रकारिता और लेखन के लिए प्रारंभिक शर्त बनता जा रहा है। सृजनगाथा ने राज्य के लेखकों के लिए वैश्विक भूमि तैयार की है।
लेखक एवं पत्रकार गिरीश पंकज ने कहा कि तकनीक का ‘नीक’ ही उसकी विशेषता है। नई तकनीक के माध्यम से देश-विदेश के लेखकों के साथ संपर्क संभव है। समूचे देश में इंटरनेट साहित्य के प्रति वातावरण बन रहा है।
हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक रमेश नैयर ने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वेब पत्रकारिता अखबारों की तरह प्रयोग में लाई जा रही है। भारत और इंडिया की खाई को पाटे बिना इंटरनेट को आम आदमी तक नहीं पहुँचाया जा सकता। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ में पर्याप्त साधन एवं सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके सहारे छत्तीसगढ़ इंटरनेट के क्षेत्र में देश का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
इतिहासविद् डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र ने छत्तीसगढ़ के इतिहास एवं संस्कृति की दुर्लभ पांडुलिपियों को इंटरनेट पर उपलब्ध करने का सुझाव दिया । समाजसेवी गोपाल अग्रवाल ने सृजनगाथा की उपलब्धियों को छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण बताया और लेखकों से वेब-पत्रकारिता एवं साहित्य से जुड़ने को आव्हान किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष भंडारपुरी के गुरु गद्दीनशीन बालदास साहेब ने इंटरनेट को समाज के उपेक्षित लोगों का मंच बनाने के लिए कहा।
इस अवसर पर पत्रकारिता के लिए तुषार कांति बोस(संपादक-दंडकारण्य समाचार), जगदलपुर, रेडियो मीडिया के लिए लाल राम कुमार सिंह, इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए संजय शर्मा(संवाददाता-सहारा समाचार), फिल्म मीडिया के लिए तपेश जैन, फोटो पत्रकारिता के लिए विनय शर्मा(नई दुनिया दैनिक) तथा वेब-पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय न्यूज सर्विस रायपुर को ‘सृजन-गाथा’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधीर शर्मा ने किया । आयोजन में वेब-पत्रकारिता को संचालित करने वाले छात्र प्रशांत रथ, मिनीमाता फाउंडेशन के प्रमुख रामशरण टंडन, डा रामकुमार बेहार, रामेश्वर वैष्णव, शिवशंकर शुक्ल, डॉ. जे.आर. सोनी, चेतन भारती, गौतम पटेल, एच.एचठाकुर, मधुसूदन शर्मा, राजाघाट चावरे, रामेश्वर शर्मा, गिरीशराज साहू, अनुपम वर्मा, एस.अहमद, रमेश जैन, ठाकुर राम साहू सहित अनेक पत्रकार साहित्यकार, बुद्धिजीवी उपस्थित थे। मुख्यअतिथि बसंत कुमार तिवारी ने महाकौशल की स्थापना से लेकर अनेक अनुभवों को रेखांककित करते हुए कहा कि आज के पत्राकारों के समक्ष नई चुनौतियां हैं। नई पीढ़ी तकनीक का उपयोग प्रभावी ढंग से कार्य पर सकती है, लेकिन अपने मूल्यों को साथ लेकर चलना होगा।(राम पटवा की रिपोर्ट)
