ई-पताः srijjangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 16, सितम्बर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

छंद

 उ

सन्नाटा मन का


इंदिरा मोहन

 

अपने मन का सन्नाटा ही

करता है बेहाल

हिलते हाथ, थके संबोधन

अश्रु धुले रूमाल

 

तन्हाई में ऊबा-ऊबा

कुहनी धर मन सोता

आस पास काजल की कालिख

शंका से मन रोता

दरवाज़े पर नीम खाँसता

बीता यह भी साल

 

विश्वास का जोड़-घटाना

हँसी अधर से खिसकी

अपनों से अपनी ही दूरी

तस्वीरें जिस-जिस की

सब त्योहार हो गये सूने

जेबें पड़ी निढाल

 

उन्मादों की हर पल हलचल

अस्त-व्यस्त है रातें

बतियाना भूली चिंतातुर

प्रियतम की सौगातें

शीत लहर व्यापी है घर-घर

व्यर्थ बजाती गाल  

इंदिरा मोहन

12, लखनऊ रोड़

दिल्ली - 54

 

 

  छंदकार

गीत

- आनंदी सहाय शुक्ल

- ज्ञानेन्द्र साज

- अनिल अनवर

- रामदयाल

- डॉ. अजय पाठक

नवगीत

- डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

- नईम

- ऋषिवंश

- विद्यानंदन राजीव

- इंदिरा मोहन

ग़ज़ल

- रईस अहमद 'फ़िगार'

- अग्निवेश शुक्ल

- तुली फकीरचंद जलंधरी

- सुल्तान अहमद

- विज्ञान व्रत

दोहे

- चंद्रसेन विराट

- आचार्य भगवत दुबे

- पुरुषोत्तम 'यक़ीन'

- प्रभु त्रिवेदी

- जितेन्द्र जौहर

माह के छंदकार

- कैलाश गौतम

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google

 
 WWW http://www.srijangatha.com